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कर्मचारी नेताओं का बड़ा हमला : घनश्याम ने कहा, ‘तीन साल में उजड़ गया प्रदेश’

जश्न किस बात का? तीन साल में सुक्खू सरकार ने तोड़े सारे भरोसे: पेंशनर्स महासंघ का तीखा वार

धर्मशाला

हिमाचल प्रदेश सरकार के व्यवस्था परिवर्तन को लेकर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने सुक्खू सरकार पर करारा हमला बोला है। शर्मा ने कहा,’ये कैसा व्यवस्था परिवर्तन है, जिसमें महिला, युवा, कर्मचारी, अधिकारी ही नहीं हर वर्ग दुःखी है। आमजन त्रस्त हैं लेकिन सुक्खू सरकार मस्त है।

शर्मा ने सुक्खू सरकार के तीन साल के कार्यकाल को “सबसे निराशाजनक और विफल बताते हुए कहा कि सरकार तीन साल का जश्न मनाने जा रही है, जबकि प्रदेश आपदा से चोटिल और जनता परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सबसे ज़्यादा कर्ज़ लिया, पर पैसा गया कहां? कर्मचारी भत्ते रुके हुए हैं, कई विभाग वेतन के लिए तरस रहे हैं, इलाज के बिल अटके हुए हैं, डीए तक नहीं मिला। हिमकेयर योजना पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।

पेंशनर्स नेताओं ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के लिए कर्मचारियों के साथ छल किया है। ओपीएस के नाम पर वोट लिए, लेकिन आज तक किसी को भी ओपीएस नहीं मिल रहा। ये जनता और कर्मचारियों के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के उस बयान को भी कटघरे में रखा, जिसमें उन्होंने कहा था कि एचआरटीसी कर्मचारियों को हर महीने की पहली तारीख तक वेतन-पेंशन मिलेगी। कहां है वह घोषणा? कौन-सा विभाग समय पर वेतन पा रहा है?

महासंघ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि धर्मशाला में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान 28 नवंबर को ज़ोरावर स्टेडियम में प्रदेश भर के पूर्व कर्मचारी बड़े स्तर पर सरकार का घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार कर्मचारियों की समस्याओं पर चुप बैठी रही तो आंदोलन और ज़्यादा उग्र होगा। यह पहली सरकार है जो अपने वेतन और भत्ते बढ़ाने में तो आगे है, लेकिन कर्मचारियों की देनदारियां चुकाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से कर्मचारी हितों से हटकर सिर्फ़ सत्ता-सुख की तरफ़ झुक गई है।

इस मौके पर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्मानंद कर्मचारी नेता बलराम पुरी, सुभाष पठानिया, मदन चौधरी और अश्वनी बत्रा भी मौजूद रहे, जिन्होंने एक सुर में सुक्खू सरकार की नीतियों पर गहरी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि कर्मचारियों के धैर्य की अब परीक्षा नहीं ली जाए।

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