शीतकालीन सत्र से पहले ही मुख्यमंत्री का भाजपा पर तीखा हमला
कहा, विपक्ष सत्र में बहस करने के बजाय पिकनिक मनाने आता है, तो ये उनकी राजनीतिक शैली है
धर्मशाला
हिमाचल विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। सता पक्ष और विपक्ष ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। वहीं मंगलवार शाम को धर्मशाला पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले ही भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष चाहे जो भी मुद्दे लेकर आए, सरकार तथ्यों के साथ सदन में चर्चा करेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार के तीन वर्षों के कार्यकाल पर चर्चा के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को भी तथ्यों के साथ आना चाहिए। सत्र को लंबा रखने का उद्देश्य यही है कि विपक्ष पूरा समय लेकर आए और सदन में सार्थक चर्चा करे। दिसंबर में प्रदेश में पर्यटन सीजन रहता है, इसके चलते पहले शीतकालीन सत्र छोटा रखना पड़ता था। इस वर्ष पर्यटन सीजन को ध्यान में रखते हुए सत्र को नवंबर में आयोजित किया गया है, ताकि पूरा समय बहस को मिल सके।’
एक सवाल के जवाब पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष सत्र में बहस करने के बजाय पिकनिक मनाने आता है, तो ये उनकी राजनीतिक शैली है। विपक्ष के पास सदन में उठाने योग्य ठोस मुद्दे नहीं होते, इसलिए वो वॉकआउट कर देते हैं, ताकि मीडिया में सुर्खियां बटोर सकें और दिल्ली में बैठे अपने आकाओं को खुश कर सकें।’
सत्र में होंगी कुल 8 बैठकें
हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा का 10वां सत्र 26 नवंबर से धर्मशाला के तपोवन परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र में कुल 8 बैठकें होंगी, जिनमें 28 नवंबर और 4 दिसंबर को गैर-सरकारी सदस्य कार्य के लिए निर्धारित किया गया है। शीतकालीन सत्र सत्र के लिए सदस्यों की ओर से कुल 744 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिनमें 604 तारांकित,140 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। नियम 62 के तहत 11, नियम 63 के तहत 4, नियम 101 के अंतर्गत 7, नियम 130 के तहत 16, नियम 324 के तहत 1 सूचना प्राप्त हुई है।
पठानिया ने कहा कि प्रश्नों में जिन विषयों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है, उनमें आपदा प्रबंधन और केंद्र से सहायता राशि, हालिया भारी बारिश, बाढ़ और प्राकृतिक आपदा की स्थिति, स्कूलों का विलय और शिक्षा संस्थानों का उन्नयन, स्वास्थ्य संस्थानों की बेहतरी, सड़कों व पुलों का निर्माण तथा स्वीकृत परियोजनाओं की डीपीआर, विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति, पर्यटन, उद्यान, पेयजल आपूर्ति, युवाओं में नशाखोरी की रोकथाम, परिवहन सुधार और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। सदस्य अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दों को भी सवालों के माध्यम से उठा रहे हैं।



