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धर्मशाला में सबसे बड़ा जमीन घोटाला : 9 फर्जी इंतकाल से 35 रजिस्ट्रियां

असली मालिक कौन ? फर्जी इंतकाल सामने आने के बाद भी कार्रवाई में देरी!

धर्मशाला।

हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला में सरकारी जमीन को कौड़ियों के भाव निजी हाथों में बेचने का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला खतरनाक मोड़ ले चुका है। सूत्रों का कहना है कि इस जमीन खरीदने घोटाले में नेता, अधिकारी, कारोबारी और राजस्व विभाग के कर्मचारी तक शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अब इस मामले में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ खुफिया विभाग भी सक्रिय होकर जांच में जुट गया है।

सूत्रों का कहना है कि जमीन खरीदने वाले छह से अधिक लोगों ने पहले ही जिला कांगड़ा पुलिस में उनके साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज करवाई है। साल 2020 में धर्मशाला में तैनात तत्कालीन तहसीलदार अपूर्व ने इन इंतकालों की रिव्यू जांच शुरू की थी। हालांकि, पांच साल बाद भी जांच पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नूरपुर उपमंडल से जुड़े कुछ लोगों का समूह सोमवार को डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा से मिला और अपना पक्ष रखा। इनमें से कई खरीदारों ने खुद को ठगा हुआ बताया। इन लोगों ने 68 कनाल जमीन खरीदी थी।

‘संलिप्त कर्मचारियों, अधिकारियों पर होगी कार्रवाई’
डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। 9 इंतकालों के तहत हुई 35 रजिस्ट्रियों को राजस्व नियमों के अनुसार रद्द करने की प्रक्रिया जारी है। यह मामला तब उजागर हुआ जब साल 2016 में धर्मशाला को नगर निगम और स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला। इससे पहले क्षेत्र में बिना नक्शा पास कराए निर्माण संभव था, लेकिन नगर नियोजन नियम लागू होते ही खरीदारों को अहसास हुआ कि वे कानूनी तौर पर फंसे हुए हैं। पूर्व राजस्व अधिकारियों के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में इस भूमि की एंट्री ‘गैर मारूसी कब्जा’ के रूप में दर्ज है। सवाल यह है कि गैर मारूसी भूमि पर मालिकाना हक कैसे दिया गया। आरोप है कि पहले कुछ लोगों ने खुद को मालिक दिखाया और फिर उसी आधार पर 9 भूखंड बनाकर 35 इंतकाल कर दिए।

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