पोंग डैम वेटलैंड : 15 साल पहले किए गए वैज्ञानिक अनुसंधान को मिली बड़ी सफलता
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षी संरक्षण नीतियों को दिशा देने में होगा सहायक सिद्ध
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वेटलैंड, पोंग डैम वाइल्ड लाइफ सैंचुरी से पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक जानकारी सामने आई है। पोंग डैम क्षेत्र में हाल ही में देखी गई एक प्रवासी चिड़िया, जिसके गले में पहचान के लिए टैग लगी हुई थी, के संबंध में वैज्ञानिक पुष्टि प्राप्त हुई है कि इस पक्षी को मार्च 2011 में पोंग डैम झील में ही रिंग किया गया था।
डिप्टी कन्सरवेटर ऑफ फोरेस्ट रेजिओल्ड राॅयस्टन ने बताया कि भारत की प्रतिष्ठित संस्था बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के वेटलैंड्स प्रोग्राम की वैज्ञानिकों द्वारा सांझा की गई जानकारी में बताया गया है कि संबंधित प्रवासी पक्षी इतने लंबे अंतराल के बाद भी उसी शीतकालीन प्रवास स्थल पोंग डैम झील पर पुनः लौटा है जोकि पक्षी विज्ञान के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा की स्थिति अब भी अनुकूल
विशेषज्ञों के अनुसार प्रवासी पक्षियों में किसी निश्चित स्थल पर बार-बार लौटने की प्रवृत्ति को साइट फिडेल्टि कहा जाता है। 15 वर्षों के बाद भी उसी स्थल पर लौटना यह दर्शाता है कि पोंग डैम झील की पारिस्थितिकी, भोजन की उपलब्धता, जल स्तर और सुरक्षा की स्थिति अब भी अनुकूल बनी हुई है। यह दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों की सफलता का जीवंत प्रमाण है। रिंगिंग या टैगिंग की प्रक्रिया वैज्ञानिकों को पक्षियों की आयु, प्रवास मार्ग, व्यवहार, स्वास्थ्य और जीवनकाल से संबंधित अमूल्य जानकारी प्रदान करती है। पोंग डैम से प्राप्त यह डेटा भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षी संरक्षण नीतियों को दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा।
2002 में मिला रामसर साइट का दर्जा
पोंग डैम झील को वर्ष 1994 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड घोषित किया गया था तथा वर्ष 2002 में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर कनवेंशन के अंतर्गत रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ। यह हिमाचल प्रदेश की पहली वेटलैंड है जिसे यह सम्मान मिला। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में मध्य एशिया, तिब्बत, मंगोलिया और साइबेरिया जैसे क्षेत्रों से हजारों प्रवासी पक्षी पोंग डैम झील में आते हैं। इनमें बार-हेडेड गूज, नाॅर्दर्न पिंटेल, काॅमन कूट, ग्रेलैग गूज सहित अनेक दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियाँ शामिल हैं।
वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध
इस उपलब्धि में स्थानीय पक्षी प्रेमियों, फोटोग्राफरों और जागरूक नागरिकों की भूमिका भी सराहनीय रही है। टैग लगी चिड़िया को देखकर उसका रिकाॅर्ड सांझा करना वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आम नागरिक इसी प्रकार संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ प्रकृति से जुड़ी जानकारी साझा करें, तो संरक्षण प्रयास और अधिक सशक्त हो सकते हैं।
पोंग डैम झील में 11 वर्षों बाद टैग की गई प्रवासी चिड़िया की पुनः वापसी केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश में वेटलैंड संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान की एक बड़ी सफलता है। यह उपलब्धि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मजबूत संदेश देती है।
220 से अधिक प्रजातियों के पक्षी
डिप्टी कन्सरवेटर ऑफ फोरेस्ट रेजिओल्ड राॅयस्टन बताते हैं कि पोंग डैम झील हर वर्ष शीत ऋतु में एशिया और यूरोप के विभिन्न भागों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल रहती है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार झील में 220 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं जिनमें 100 से 120 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी तथा 90 से अधिक स्थानीय रेजिडेंट प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। अच्छे वर्षों में शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की संख्या 1.2 लाख से 1.5 लाख तक रहती है।
रेजिओल्ड राॅयस्टन ने बताया कि पोंग डैम झील वन्यजीव अभयारण्य में हाल ही में हिमाचल प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों व फील्ड स्टाफ, प्रशिक्षित पक्षी विशेषज्ञों (बर्ड वाॅचर्स) तथा स्थानीय स्वयंसेवकों के सक्रिय सहयोग से वार्षिक जलपक्षी गणना-2026 का सफल आयोजन किया गया। गणना से पूर्व अभयारण्य क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया। रेजिओल्ड राॅयस्टन ने बताया कि इस वर्ष की गणना में कुल 1,24,344 जल-आश्रित पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई है।



