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हजारों पेंशनर्स गरजे…चक्का जाम किया, लेकिन मिला तो सिर्फ आश्वासन!

हमारी सरकार से कोई मांग नहीं है, हम सिर्फ हमारा हक मांग रहे हैं

 

धर्मशाला

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर शुक्रवार को हजारों की संख्या में पेंशनरों ने धर्मशाला में पुलिस ग्राउंड से ऐतिहासिक आक्रोश रैली निकाली। सुबह करीब साढ़े दस बजे से हिमाचल के कौने-कौने से (हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों से) पेंशनरों का पुलिस ग्राउंड में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। स्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। जो भी पेंशनर अपने निजी वाहन या टेम्पो ट्रैवलर या बस से यहां पहुंच रहे थे उनके वाहन पुलिस ग्राउंड के अंदर ही पार्क करवाए जा रहे थे। प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए किन्नौर सहित कई जिलों से बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष भी पहुंचे।

लगभग 11 बजे से वक्ताओं ने अपने विचारों से सभा स्थल पर उपस्थित पेंशनरों को सम्बोधित करना शुरू किया, जिससे माहौल बना रहे। जब हजारों की संख्या में पेंशनर्स पहुंच गए तो मुख्य वक्ताओं ने मंच संभाला और अपने विचारों से पेंशनर्स को अवगत कराया। पुलिस ग्राउंड और जोरावर स्टेडियमें में पेंशनर्स की पीड़ा उनके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी। पेंशनर्स चिल्ला-चिल्ला कर एक ही बात कह रहे कि हमारी सरकार से कोई मांग नहीं है, हम सिर्फ हमारा हक मांग रहे हैं। जिस उम्र के पड़ाव पर हमें अपने पोते-पोतियों के साथ खेलना चाहिए, उस उम्र में अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। सरकार ने हमारे डीए रोक दिए… भत्ते रोक दिए, कैसे गुज़ारा करें। इस दौरान माहौल देखते ही बन रहा था। कई बार तो ऐसा लगा कि आज तो कुछ होकर ही रहेगा और करीब एक बजे के आसपास हुआ भी कुछ ऐसा।

मंच से ऐलान हुआ कि सभी पेंशनर्स अब विधानसभा तपोवन के लिए कूच करेंगे। बस फिर क्या था, पुलिस ग्राउंड का मुख्य गेट जो सुबह से खुला हुआ था पुलिस ने बंद कर दिया। मतलब इन्हें कूच करने से रोकने की कोशिश की गई, लेकिन आप भी समझ सकते हैं कि यह हजारों की भीड़ कहां मानने और रुकने वाली थी। पेंशनर्स ने मुख्य गेट को धकेलना शुरू कर दिया। हजारों की भीड़ को रोकने के लिए तैनात पुलिस भी कुछ नहीं कर सकी और आखिरकार पेंशनर्स ने धक्का लगाकर गेट खोल दिया। मौके पर मौजूद पुलिस ने ट्रैफिक जाम ना हो इसलिए टुकड़ों में छोटे वाहनों को रवाना किया। लेकिन जब पेंशनर्स की यह भीड़ जोरावर स्टेडियम पहुंची तो माहौल पुलिस ग्राउंड से भी ज्यादा ख़राब हो गया। ये सभी पेंशनर्स मुख्यमंत्री से मिलने के लिए जिद्द पर अड़ गए।

इस दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए माैके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इस दाैरान पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। गुस्साए पेंशनरों ने चक्का जाम किया। काफी देर तक माहाैल बहुत ज्यादा तनावपूर्ण बना रहा। इस दाैरान नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर विधायक विपिन परमार, विधायक पवन काजल और विधायक सुधीर शर्मा जाम में फंस गए। पेंशनर्स इनकी गाड़ियों के आगे बैठ गए। सभी पेंशनर्स ने सुक्खू सरकार और पूर्व की जयराम सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध के चलते जयराम ठाकुर की गाड़ी करीब 40 मिनट तक यहां फंसी रही। जयराम ठाकुर ने पेंशनर्स से बात की, लेकिन पेंशनर्स का गुस्सा शांत नहीं हुआ। जयराम ने कहा कि भाजपा के सभी विधायकों ने विधानसभा में भी पेंशनर्स के मुद्दों को उठाया और उनकी बातों को सरकार तक पहुंचाया।

आपको बता दें कि पेंशनर्स की मुख्य मांगों में मेडिकल भत्ता, ईपीएफ और अन्य भत्तों का भुगतान शामिल है, जो कांग्रेस सरकार ने नहीं दिए। पेंशनर्स शाम पांच बजे तक प्रदर्शन करते रहे। पेंशनरों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें 5 दिसंबर तक नहीं मानी गई तो वह विधानसभा परिसर के बाहर आत्मदाह करेंगे। इसके बाद पेंशनर्स का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से बातचीत करने के लिए विधानसभा पहुंचा।

सूत्रों के अनुसार पेंशनर्स ने अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी, लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल 3-4 महीने कुछ नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह झूठ नहीं बोलते हैं। फिलहाल पेंशनर्स अपने मेडिकल बिल भेजें उन पर कुछ किया जाएगा। अभी कर्मचारियों को वेतन देना है। इस पर पेंशनर्स की ओर से सुरेश ठाकुर ने कहा कि कुछ मुद्दों पर हम आपसे विस्तार से बात करना चाहते हैं तो मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा के बाद यानि 10 दिसंबर के बाद वे उन्हें शिमला बुलाएंगे और चीफ सेक्रेटरी और फाइनेंस सेक्रेटरी के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी। और इस तरह से सुबह से गरज रहे पेंशनर्स शांत होकर लौट गए। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री एक बार फिर कामयाब हो गए। लेकिन यह हकीकत है कि सरकार के पास अभी इतना बजट नहीं है कि वह सभी मांगों को पूरा कर सके। यही कारण है कि सरकार राजस्व बढ़ाने की ओर कदम उठा रही है।

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