खपत से विकास सीमित होता है, उत्पादकता से राष्ट्र बनता है : डॉ जनक राज
मोदी सरकार का बजट 2026–27 एक क्रांतिकारी आर्थिक दर्शन के साथ सामने आया है
भरमौर (चम्बा)।
बजट 2026-27 इस सशक्त मान्यता पर आधारित है कि यदि भारत को दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सतत विकास की ऊंचाइयों पर पहुंचना है, तो उसे उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था से निकलकर उत्पादकता आधारित मॉडल की ओर निर्णायक कदम उठाने होंगे। यह कहना है डॉ जनक राज, विधायक पांगी का।
डॉ जनक राज ने कहा कि कुल व्यय ₹53.47 लाख करोड़ का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.7% अधिक है, जबकि राजकोषीय घाटे को 4.3% पर नियंत्रित रखा गया है। यह वित्तीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन का स्पष्ट संकेत है। ऋण जीडीपी अनुपात को 55.6% तक लाकर सरकार ने 2030 तक इसे 50% (±1%) पर स्थिर करने का लक्ष्य रखा है, जो आर्थिक स्थिरता की मज़बूत नींव रखता है।
उन्होंने कहा कि अब तक भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार मुख्यतः खपत रहा – सरकारी वेतन, पेंशन, सब्सिडी और आयात-आधारित उपभोग। इससे अल्पकालिक मांग तो बढ़ी, पर स्थायी रोजगार, निर्यात क्षमता और तकनीकी उन्नति सीमित रही। बजट 2026–27 इसी सोच को बदलने का साहसिक प्रयास है। कैपिटल एक्सपेंडिचर को रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास को नई गति देगा। यह बजट विकसित भारत 2047 का ब्लूप्रिंट है, जिसमें CCUS जैसी पहलों के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल विकास को भी प्राथमिकता दी गई हैं।
किसान और कृषि:उत्पादन से उत्पादकता तक
बजट में कृषि को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उच्च उत्पादक क्षेत्र के रूप में देखा गया है। सिंचाई, फसल विविधीकरण, कृषि-इंफ्रास्ट्रक्चर, भंडारण और मूल्य संवर्धन पर ज़ोर देकर किसान को कच्चा माल बेचने वाले से कृषि उद्यमी बनाने की दिशा तय की गई है। कृषि अनुसंधान, बीज सुधार और जल-संरक्षण में निवेश से कृषि आय को स्थायी रूप से बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
युवा: उपभोक्ता नहीं, उत्पादक शक्ति
डॉ जनक राज ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। बजट 2026–27 में कौशल विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और नवाचार पर विशेष ध्यान देकर युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी सृजक बनाने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। MSME, स्टार्टअप फंडिंग और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेंगे।
महिलाएं: कल्याण से आर्थिक नेतृत्व तक
यह बजट महिलाओं को केवल कल्याण की लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक उत्पादकता की धुरी मानता है। महिला उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर ज़ोर देकर महिलाओं को अर्थव्यवस्था के केंद्र में लाया जा रहा है। इससे न केवल सामाजिक न्याय सशक्त होता है, बल्कि श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर जीडीपी वृद्धि को भी गति मिलती है।
स्वास्थ्य: मानव पूंजी में निवेश
स्वास्थ्य को इस बजट में खर्च नहीं, बल्कि उत्पादक मानव पूंजी में निवेश के रूप में देखा गया है। स्वास्थ्य अवसंरचना, मेडिकल शिक्षा, डिजिटल हेल्थ और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर ज़ोर देकर सरकार यह संदेश देती है कि स्वस्थ नागरिक ही उत्पादक अर्थव्यवस्था की नींव होते हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ श्रम उत्पादकता बढ़ाती हैं, कार्यदिवसों की हानि घटाती हैं और दीर्घकाल में विकास को टिकाऊ बनाती हैं।
निर्यात और रोजगार: भारत को बेचने वाला देश बनाना
उत्पादकता का सीधा संबंध निर्यात से है। लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ाव पर ज़ोर देकर भारत को केवल बड़ा बाज़ार नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने का प्रयास किया गया है। इससे उद्योगों का विस्तार होगा और करोड़ों स्थायी रोजगार सृजित होंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुसंधान
आर्थिक उत्पादकता ही राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है। रक्षा, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन तथा अनुसंधान पर बढ़ा निवेश आत्मनिर्भर भारत को मज़बूत करता है। अनुसंधान, सेमीकंडक्टर, AI और डीप-टेक में निवेश भारत को श्रम-आधारित से ज्ञान-आधारित शक्ति में बदलने की दिशा दिखाता है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बजट 2026-27 लोकलुभावन खपत बढ़ाने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्र की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। यह बजट स्पष्ट संदेश देता है, खाने से अर्थव्यवस्था चलती है, पर बनाने से राष्ट्र खड़ा होता है। यही वह सोच है जो भारत को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाएगी।



