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अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र पर फोड़ रही प्रदेश सरकार : सुधीर शर्मा
विधायक ने कहा, हिमाचल को आर्थिक तबाही की ओर धकेलने वाली है कांग्रेस सरकार
धर्मशाला।
पूर्व मंत्री एवं विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कर्ज़, घाटे और अव्यवस्था के दलदल में धकेल दिया है और अब अपनी पूरी नाकामी छिपाने के लिए 16वें वित्त आयोग और केंद्र सरकार पर झूठे और भ्रामक आरोप लगाए जा रहे हैं। सुधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) कोई भीख नहीं था और न ही स्थायी व्यवस्था। यह 15वें वित्त आयोग द्वारा दिया गया अस्थायी सहारा था, ताकि राज्य सरकारें अपनी वित्तीय हालत सुधार सकें। लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस अवसर को लूट, फिजूलखर्ची और तुष्टिकरण में बर्बाद कर दिया।
सुधीर शर्मा ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि जिन राज्यों को वर्षों तक RDG मिला, उन्होंने न तो कर-संग्रह बढ़ाने की ईमानदार कोशिश की और न ही सरकारी खर्चों पर लगाम लगाई। हिमाचल प्रदेश इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।
विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के शासन में प्रदेश का राजस्व घाटा बेकाबू हो गया, कर्ज़ ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ चुका है और विकास योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। यह सब कांग्रेस सरकार की अयोग्यता और प्रशासनिक विफलता का सीधा परिणाम है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार जनता को यह नहीं बताती कि 16वें वित्त आयोग की नई व्यवस्था में हिमाचल प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ी है। अगर फिर भी सरकार के पास वेतन, पेंशन और विकास के लिए पैसा नहीं है, तो इसका सीधा अर्थ है कि सरकार चलाने वालों को वित्त प्रबंधन की समझ ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की स्थिति में ला खड़ा किया है। वेतन और पेंशन का संकट खुद सरकार की नीतिगत विफलता का परिणाम है, न कि केंद्र सरकार का।
सुधीर शर्मा ने कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने सीमित संसाधनों में भी वित्तीय अनुशासन दिखाया, जबकि हिमाचल में कांग्रेस सरकार ने राज्य को कर्ज़ पर कर्ज़ चढ़ाने की फैक्ट्री बना दिया। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब मुफ्तखोरी और बेलगाम खर्च का युग समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार सुधार करने के बजाय केंद्र को कोसने में व्यस्त है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार को यह जवाब देना होगा कि उसने:
•अपने कार्यकाल में राजस्व बढ़ाने के लिए क्या किया,
•फिजूलखर्ची रोकने के लिए कौन से कदम उठाए,
•और प्रदेश को कर्ज़ के जाल से निकालने की क्या योजना है।
सुधीर शर्मा ने कहा कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, बयानबाज़ी और केंद्र विरोध से प्रदेश नहीं चलता। हिमाचल की जनता अब सब समझ चुकी है। आने वाला समय कांग्रेस सरकार की आर्थिक अक्षमता, खोखले वादों और झूठे आरोपों का हिसाब मांगेगा। कांग्रेस सरकार को अपनी नाकामी स्वीकार करनी होगी-अब बहाने नहीं चलेंगे।



