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तिरंगे में घर लौटे नमांश स्याल, सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन देवभूमि के वीर

धर्मशाला

दुबई में एयर शो 2025 के दौरान भारतीय समयानुसार दोपहर 3:40 बजे ‘तेजस’ विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल (35) शहीद हो गए थे। ‘तेजस’ एयरक्राफ्ट के क्रैश होने और उसमें आग लगने के बाद इंडियन एयर फोर्स ने नामांश के निधन की पुष्टि की। यह दुःखद समाचार मिलते ही हिमाचल ही नहीं पूरे देश आंखें नम हो गई। देश ने एक बहादुर, निडर, देशभक्त पायलट खो दिया। नमांश स्याल के निधन की खबर से पूरे नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

 

रविवार दोपहर करीब एक बजे नमांश स्याल की पार्थिव देह एयरफोर्स के विशेष विमान से गगल स्थित कांगड़ा हवाई एयरपोर्ट पर लाई गई। आपको बताते चलें की नमांश स्याल के माता-पिता, पत्नी व बेटी भी पार्थिव देह के साथ आए। कांगड़ा एयरपोर्ट पर उनकी पत्नी विंग कमांडर अफशां एयरफोर्स की वर्दी में पति की पार्थिव देह के साथ पहुंची। यहां से पार्थिव देह को उनके पैतृक नगरोटा बगवां अंतर्गत गांव पटियालकड़ ले जाया गया, जहां मोक्षधाम में सैन्य सम्मान के साथ नमांश स्याल की अंत्येष्टि की गई। आपको बता दें कि नमांश स्याल और अफशां की शादी साल 2014 में दुबई में हुई थी। नमांश स्याल और अफशां के एक इकलौती बेटी है, जो सात वर्ष की है।

नमांश स्याल की चिता को मुखाग्नि उनके चचेरे भाई देंगे। नमांश स्याल के ताया जोगिंद्र स्याल और रिश्तेदार उनके घर में हैं। इन दिनों नमांश की पोस्टिंग कोयंबटूर के सैलूर में थी। उनकी पत्नी अफशां एयरफोर्स में पायलट हैं और इन दिनों कोलकाता में प्रशिक्षण पर थीं। उनकी सात वर्षीय बेटी की देखभाल के लिए नमांश के माता-पिता सैलूर में ही थे। जोगिंद्र स्याल का कहना है कि रविवार को करीब नौ बजे कोयंबटूर से एयरफोर्स के विशेष विमान में नमांश की पार्थिव देह को लाया गया। इसके बाद दिल्ली से विशेष विमान से कांगड़ा एयरपोर्ट लाया गया।

नमांश ताया-तायी का भी लाडला था। भतीजे की पार्थिव देह के इंतजार में दोनों की आंखें पथरा गई। ताया जोगिंद्र स्याल ने कहा कि उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे। नमांश स्याल के घर में अभी कोई नहीं रहता है। उनके ताया-तायी जोगिंद्र स्याल और मधु बाला सिद्धबाड़ी (धर्मशाला) में रहते हैं, जो नमांश के निधन की खबर के बाद पैतृक गांव पहुंचे।

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