स्कूली बच्चों के लिए रैली जरूरी थी या पढ़ाई ?
वीरवार को कांगड़ा जिला के सुलाह में थी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की जनसभा
सुलाह (कांगड़ा)।
हिमाचल प्रदेश में वीरवार को कांगड़ा जिला के सुलाह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की जनसभा थी। सूत्रों का आरोप है कि मुख्यमंत्री सुक्खू की जनसभा में शामिल होने के लिए सरकारी स्कूलों के सैकड़ों की संख्या में छात्र और काफी संख्या में अध्यापकों को अपनी कक्षा बीच में छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। हैरानी इस बात की है कि बच्चों की वार्षिक परीक्षा सिर पर हैं और ऐसे समय में एक नहीं बल्कि कई सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुख्यमंत्री की जनसभा में पहुंचाया गया। आप फोटो में देख सकते हैं कि स्कूली बच्चे स्कूल की यूनिफॉर्म में बैठे नजर आ रहे हैं।
जब इस संबंध में शिक्षा विभाग के उप निदेशक कमलेश ठाकुर से बात की गई तो उनका कहना था कि यह कार्यक्रम “एंटी-चिट्टा” (नशा विरोधी) जागरूकता अभियान का हिस्सा था, जिसके लिए विभिन्न सरकारी स्कूलों के कक्षा 10, 11 और 12 के छात्रों को भाग लेने के लिए कहा गया था। जबकी छात्रों ने बताया कि उन्हें सुबह स्कूल में हाजिरी लगाने के लिए कहा गया और बाद में टीचर उन्हें रैली स्थल पर ले आए।

वहीं सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गढ़ जमोला के एक छात्र ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में ले जाने से पहले स्कूल में इकट्ठा होने के लिए कहा गया था। छात्र ने कहा, “हमें यह नहीं बताया गया था कि हमारी रेगुलर क्लास छूट जाएंगी।” सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल परोर के एक अन्य छात्र ने कहा, “रैली के कारण उसकी स्कूल और ट्यूशन दोनों क्लास छूट गईं। परीक्षाएं आ रही हैं और हमने पढ़ाई का एक महत्वपूर्ण दिन खो दिया।”
जब इस इस संबंध में अध्यापकों से बात की गई तो एक महिला शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हुईं हैं। उन्होंने कहा, “स्कूल प्रिंसिपलों को कक्षा 10, 11 और 12 के छात्रों को मुख्यमंत्री की रैली में लाने का निर्देश दिया गया था,” और कहा कि यह मार्च में शुरू होने वाली परीक्षाओं से ठीक पहले एक संवेदनशील समय पर हुआ।
उधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता और सुलह के विधायक विपिन परमार ने कहा, “पब्लिक का रिस्पॉन्स कम होने के कारण सीटें भरने के लिए स्टूडेंट्स को रैली में आने के लिए मजबूर किया गया।”



