राजनीतिहिमाचल प्रदेश

विधायक परमार ने क्यों कहा, ‘ यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है’

कहा, हिमाचल की कांग्रेस सरकार दबा रही विधायकों की आवाज

धर्मशाला।

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके लिए लोकतंत्र, संविधान और जनहित कोई मायने नहीं रखते। निर्वाचित विधायकों की विधायक क्षेत्र विकास निधि और ऐच्छिक निधि को जानबूझकर रोककर सरकार न केवल जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रही है, बल्कि प्रदेश की जनता के विकास अधिकारों पर सीधा प्रहार कर रही है। यह कदम प्रशासनिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित तानाशाही सोच का परिणाम है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि विधायक निधि कोई सरकार की कृपा नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत जनहित के कार्यों के लिए दिया गया अधिकार है। इस निधि के माध्यम से सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, सामुदायिक भवन और आपदा राहत जैसे छोटे लेकिन अत्यंत आवश्यक विकास कार्य पूरे किए जाते हैं। कांग्रेस सरकार इस निधि को रोककर सीधे-सीधे जनता को दंडित कर रही है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि जो सरकार दिन-रात आर्थिक संकट का रोना रोती है, वही सरकार सत्ता में आते ही हजारों करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची कर चुकी है। मित्रों को चेयरमैन पद, कैबिनेट रैंक, सरकारी वाहन, बंगले और अन्य सुविधाएं बांटी गईं, लेकिन जब बात जनता के चुने हुए विधायकों की आती है तो खजाना खाली होने का बहाना बनाया जाता है। यह दोहरा चरित्र कांग्रेस सरकार की असलियत उजागर करता है।

RDG ग्रांट पर कांग्रेस फैला रही भ्रम
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अब RDG ग्रांट को लेकर भी जनता को गुमराह कर रही है। सच्चाई यह है कि RDG ग्रांट किसी एक राज्य के साथ भेदभाव के कारण नहीं, बल्कि वित्त आयोग के निर्णय के तहत बंद की गई है और यह केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के कुल 17 राज्यों को यह ग्रांट अब नहीं मिल रही है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस इस तथ्य को जानबूझकर छिपा रही है और केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाकर हिमाचल की जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस शासित राज्यों में स्वयं इस ग्रांट को लेकर पहले आपत्तियां जताई जा चुकी हैं, लेकिन आज वही कांग्रेस इसे राजनीतिक हथियार बनाकर इस्तेमाल कर रही है।

केंद्र सरकार की मदद पर राजनीति कर रही कांग्रेस
परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार का रवैया शुरू से ही केंद्र विरोधी और विकास विरोधी रहा है। केंद्र सरकार लगातार हिमाचल प्रदेश को हर संभव सहायता दे रही है, लेकिन प्रदेश सरकार उसे स्वीकार करने, सही ढंग से उपयोग करने और समय पर खर्च करने में पूरी तरह विफल रही है। योजनाओं का क्रियान्वयन न होना, केंद्र से मिलने वाले धन का सही हिसाब न देना और फिर आर्थिक संकट का रोना, यही कांग्रेस सरकार की कार्यशैली बन चुकी है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर आधारित है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रक्षा और ग्रामीण विकास पर ऐतिहासिक निवेश किया गया है। टैक्स डिवॉल्यूशन और ग्रांट-इन-एड के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है, बावजूद इसके कांग्रेस सरकार विकास कार्यों को गति देने में पूरी तरह नाकाम रही है। लोकतंत्र को कुचलने की साजिश

भ्रम फैलाना कांग्रेस सरकार की साजिश का हिस्सा
परमार ने कहा कि विधायक निधि रोकना और RDG जैसे मुद्दों पर भ्रम फैलाना कांग्रेस सरकार की उस साजिश का हिस्सा है, जिसके तहत वह विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है। यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि जो सरकार के खिलाफ बोलेगा, उसके क्षेत्र का विकास रोक दिया जाएगा। यह सोच लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि तानाशाही है। उन्होंने कहा कि विधायक निधि न मिलने से प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्कूलों की मरम्मत, पेयजल योजनाएं, खेल मैदान, सामुदायिक भवन और आपदा प्रभावित क्षेत्रों के कार्य ठप पड़े हैं। इसकी कीमत प्रदेश की जनता चुका रही है, न कि कोई राजनीतिक दल।

भाजपा करेगी निर्णायक संघर्ष
परमार ने दो टूक कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस अन्याय को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। यदि कांग्रेस सरकार ने तुरंत विधायक निधि बहाल नहीं की और जनता के विकास से खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो भाजपा सड़क से लेकर सदन तक निर्णायक संघर्ष करेगी। जनता को कांग्रेस की सच्चाई से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह तानाशाही रवैया छोड़कर संवैधानिक मर्यादाओं में लौटे। जनता ने शासन का अधिकार दिया है, बदले की राजनीति का लाइसेंस नहीं। हिमाचल प्रदेश की जनता सब देख रही है और समय आने पर इस जनविरोधी, भ्रम फैलाने वाली और विफल सरकार को करारा जवाब देगी।

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