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केंद्र के बजट-2026 से हिमाचल निराश, यह राज्यों के अधिकारों पर चोट: प्रो. चंद्र कुमार

कहा, पहाड़ी व संसाधन-संरक्षण करने वाले राज्यों को आर्थिक संकट की ओर धकेला जा रहा

धर्मशाला।

कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने केंद्र सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र द्वारा अपनाई जा रही नीतियाँ संघीय ढांचे की भावना के विपरीत हैं और इससे विशेष रूप से पहाड़ी व संसाधन-संरक्षण करने वाले राज्यों को आर्थिक संकट की ओर धकेला जा रहा है।

प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि वर्ष 1952 से भारत में वित्त आयोग की व्यवस्था लागू है, जो भारतीय संविधान के अंतर्गत गठित होती है। इसका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर उन्हें न्यायसंगत सहायता प्रदान करना रहा है। हर पाँच वर्ष में गठित होने वाला यह आयोग राज्यों में जाकर उनके खर्च, आय के स्रोतों और विशेष परिस्थितियों का अध्ययन करता था। उन्होंने कहा कि पहले के वित्त आयोगों ने हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता प्रदान की, जिससे राज्य अपने विकासात्मक और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर सका।

कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय हित में ग्रीन फेलिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन को तो लाभ मिला, लेकिन राज्य की एक बड़ी आय समाप्त हो गई। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा इस राजस्व हानि की भरपाई के लिए पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जंगलों का संरक्षण पूरे देश के हित में है, लेकिन उसका आर्थिक भार केवल हिमाचल जैसे राज्यों पर डालना अन्यायपूर्ण है।

प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं हैं, उत्पादन सीमित है और जनसंख्या कम होने के कारण जीएसटी तथा अन्य करों में राज्य का हिस्सा भी कम बनता है। पर्यटन से होने वाली आय भी मौसमी है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण मैदानी राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक महँगा पड़ता है। एक किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए कई किलोमीटर का घुमावदार मार्ग बनाना पड़ता है, जिससे लागत अत्यधिक बढ़ जाती है।

कृषि मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद अधिकांश कर राजस्व केंद्र के पास चला जाता है। वितरण का फार्मूला जनसंख्या आधारित होने के कारण हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्यों को अपेक्षाकृत बहुत कम राशि प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता पर अतिरिक्त करों का बोझ नहीं डाल सकती, फिर भी वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए सीमित संसाधनों में बेहतर प्रबंधन किया गया है।

प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार ने शराब पर उपकर सहित अन्य उपायों से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। इस धन का उपयोग किसानों, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। दूध के बेहतर दाम सुनिश्चित कर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

कृषि मंत्री ने हालिया केंद्रीय बजट को हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय बजट में रेलवे विस्तार के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया, पर्यटन सर्किटों को बजट से बाहर रखा गया, कृषि क्षेत्र के लिए अपेक्षित सहायता नहीं दी गई, पर्वतीय विकास की अनदेखी की गई है। उन्होंने भानुपल्लीदृबिलासपुरदृलेह रेल परियोजना सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं पर बजटीय चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। ये योजनाएं ग्रामीण, गरीब और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा हैं। इन्हें समाप्त या सीमित करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। कृषि मंत्री ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे की रक्षा हो। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंच पर अपनी आवाज उठाती रहेगी।

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