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करीब 40 घंटे बाद : जख्मों को भुलाकर फिर आपकी सेवा में

लोगों से मिलने वाली भावनाएं, दुलार प्रेम शायद ये शब्द भी बहुत छोटे

धर्मशाला।

हवा का एक झोका आया और एक पल में वो धब्बे छोड़ गया, जो किसी भी शख्स के दिलो-दिमाग से शायद ही कभी बाहर निकल सके या ये कहें भुलाया जा सके। पर्यटक को पर्यटक नहीं, कस्टमर को कस्टमर नहीं बल्कि परिवार का एक अहम सदस्य मानने वाले HPTDC का ख्याति प्राप्त होटल धौलाधार करीब 40 घंटे बाद ही अपने सभी जख्म, दर्द को भुलाकर एक बार फिर आपकी सेवा में हाजिर होने जा रहा है। इसकी मुख्य वजह है लोगों से मिलने वाली भावनाएं, दुलार प्रेम शायद ये शब्द भी बहुत छोटे हैं। इन सभी के कारण HPTDC का हर एक अधिकारी, हर एक कर्मचारी आपकी सेवा में दिन-रात खड़ा रहता है।

4 दिसंबर 2025, घड़ी की सुईं ने जैसे ही 7 बजकर 38 मिनट का समय बताया, एक ऐसा तूफ़ान आया, हर किसी के होश उड़ गए। होटल धौलाधार में एकाएक अफरातफरी का माहौल हो गया, हर कोई होटल में ठहरे हुए अपने अतिथियों को होटल से बाहर जाने के लिए कहने लगा। अतिथि भी यह सुनकर हैरान कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है। लेकिन जब मालूम चला तो पैरों के नीचे से जमीन निकल गई। सामने देखा आग का शोला। जिस समय होटल में यह घटना हुई उस समय फर्स्ट फ्लोर पर बने कांफ्रेंस हॉल में एक पार्टी की तैयारी चल रही थी। सभी को तुरंत होटल खाली करने के लिए कहा गया।

7 बजकर 55 मिनट पर अग्निशमन विभाग में फ़ोन की घंटी बजती है, सामने से आवाज सुनाई देती, जल्दी आ जाओ, आग लग गई। अग्निशमन विभाग के फायर ऑफिसर आव देखते हैं और ना ताव, अपने साथियों को लेकर गोली की भांति 7 बजकर 56 मिनट पर होटल धौलाधार के लिए कुछ करते हैं। अग्निशमन विभाग की गाड़ी होटल के परिसर में पहुंचती है, अचानक से गाड़ी का शीशा मुख्य द्वार के एक कोने से टकरा जाता है। गाड़ी का शीशा टूट जाता है, लेकिन इसकी परवाह ना करते हुए अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए आग के शोले पर काबू पाने के प्रयास शुरू हो जाते हैं।

कहते हैं जब इरादे मजबूत हों तो जीत तय होती है। करीब दो घंटे की कठिन मेहनत के बाद अग्निशमन विभाग आग पर काबू पा लेते हैं। ऐतिहासिक होटल को बचा लिया जाता है, नहीं बचता है तो सिर्फ किचन और होटल का कुछ हिस्सा।

आपको बताते चलें कि HPTDC का यह होटल कोतवाली बाजार के बीचों-बीच स्थित होने से लोगों के दिल में बसता है। इसे पर्यटक या स्थानीय लोग ही नहीं वीवीआईपी भी बेहद पसंद करते हैं। यही कारण है कि जब भी धर्मशाला या समीपवर्ती क्षेत्र में कोई भी वीवीआईपी विजिट पर आते हैं तो होटल धौलाधार के कर्मचारी पूरी मुस्तैदी के साथ सेवा में हाजिर होते हैं और पारंपरिक हिमाचली व्यंजन ही नहीं बल्कि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों की एक आकर्षक श्रृंखला पेश करते हैं।

अब सिर्फ हमें दिल पर पत्थर रखकर उस रात मिले जख्मों को भुलाकर रेस में आगे बढ़ना है आपके अटूट स्नेह और दुलार के साथ।

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