धर्मशाला में पहली बार व्यापारियों का फूटा गुस्सा, सामान फेंका, प्रशासन अनभिज्ञ
पुलिस ग्राउंड धर्मशाला में 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक था कांगड़ा वैली कार्निवल

धर्मशाला।
कांगड़ा जिला प्रशासन की ओर से पुलिस ग्राउंड धर्मशाला में 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक कांगड़ा वैली कार्निवल का आयोजन किया गया था। इस दौरान पुलिस ग्राउंड में प्रदेश और बाहरी राज्यों के व्यापारियों की ओर से सर्दी के मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, फूल, प्लास्टिक का सामान, लकड़ी के सामान, कालीन सहित अन्य सामान के स्टॉल लगाए गए। इन दुकानदारों को प्रशासन ने यहां पर 4 जनवरी तक व्यापार करने की इजाजत दी थी, लेकिन आज 7 जनवरी तक कुछ स्टॉल्स लगे रहने पर कोतवाली और कचहरी व्यापार मंडल के कुछ व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। बस फिर क्या था, कार्निवल मेले को बंद करवाने के लिए दोपहर साढ़े 12 बजे दोनों व्यापार मंडलों के मौजूद व्यापारियों ने पुलिस ग्राउंड पहुंचकर टेबल पर सजा सामान और हैंगिंग सामान कुछ इस अंदाज में फेंकना शुरू कर दिया। आक्रोशित व्यापारियों ने इन दुकानदारों को एक घंटे के अंदर सभी सामान पैक करने का समय दिया। आक्रोशित व्यापारियों के सामने दुकानदार सिर्फ हाथ जोड़कर यह विनती करते रहे कि हम आज सामान पैक कर रहे हैं। इस दौरान कई बार माहौल गर्म होते हुए भी देखा गया। धर्मशाला के व्यापारियों की इस तरह की कार्रवाई पहली बार देखने को मिली।

हैरानी इस बात है कि इन चंद व्यापारियों को इस तरह से दूसरे व्यापारियों का सामान फेंकने की इजाजत किसने दी। होना तो यह चाहिए था कि यदि इन व्यापारियों को अपना विरोध ही जताना था तो पहले प्रशासन के पास जाते, पुलिस की मदद लेते। लेकिन इस तरह से किसी भी छोटे दुकानदारों के साथ व्यवहार करना तर्क संगत नहीं है। आख़िरकार ये लोग भी अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए इधर से उधर भटकते रहते हैं। और सबसे बड़ी बात मेले में दुकान लगाने वाले दुकानदार किसी बड़ी ग्रुप से ताल्लुक नहीं रखते हैं।

दरअसल, स्थानीय व्यापारियों का यह गुस्सा आज का नहीं है। चाहे दाड़ी मेला हो या दशहरा मेला, हर बार स्थानीय व्यापार मंडल प्रशासन से मांग करता है कि इस तरह के मेले लगाने से उनके कारोबार पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। प्रदेश की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक संध्या या कार्निवल होने चाहिए, लेकिन बाहरी व्यापारियों को बुलाकर दुकानें नहीं लगवानी चाहिए।

जब हमने मेला लगाने आए दुकानदारों से बात की तो उन्होंने कहा, हम आज सामान ही पैक कर रहे थे। सामान को पैक करने में समय लगता है। फिर भी इन्होंने विरोध किया तो क्या कह सकते हैं। चम्बा से दुकान लगाने आई एक दुकानदार ने कहा, साहब क्या करें। जब इस संबंध में ADM शिल्पी बेक्टा से बात की तो उन्होंने कहा कि कार्निवल में वेंडर को दुकान लगाने के लिए 4 जनवरी तक के लिए इजाजत दी गई थी, जबकि सामान उठाने के लिए 8 जनवरी तक का समय दिया गया है। यदि 8 जनवरी तक सामान नहीं उठाया गया तो 9 जनवरी को सामान जब्त किया जाएगा। आज स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस ग्राउंड में जो विरोध प्रदर्शन किया उसकी कोई जानकारी नहीं है।



