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बोह वैली में बन रहा प्रदेश का पहला ट्राउट हब, स्वरोजगार का नया अध्याय

3.03 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत, बोह में ट्राउट हैचरी बनकर तैयार

धर्मशाला।

हिमाचल में जिला कांगड़ा अंतर्गत शाहपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर धारकंडी क्षेत्र की बोह घाटी जहां अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रदेश ही नहीं ही देशभर में प्रसिद्ध है, वहीं अब यह घाटी पर्यटन के साथ-साथ ट्राउट उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। आपको बता दें कि खबरू वाटरफॉल की कलकल ध्वनि, बर्फ से लदी पहाड़ियां और घने हरे-भरे जंगल इस क्षेत्र को प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए स्वर्ग समान बनाते हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा से साकार हो रहा सपना
शाहपुर के विधायक एवं उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया का कहना है कि अपने प्रथम विधायक प्राथमिकता बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से धारकंडी क्षेत्र में ट्राउट हब स्थापित करने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री सुक्खू ने जिला कांगड़ा के इस क्षेत्र में ट्राउट हब की स्थापना की घोषणा अपने पहले ही बजट में की। अब यह घोषणा मूर्त रूप ले रही है और इसके लिए 3.03 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुका है और बोह में ट्राउट हैचरी भी बनकर तैयार है।

सुदृढ़ होगी स्थानीय लोगों की आर्थिकी
ट्राउट हब बनने से न केवल स्थानीय लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी बल्कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। विधायक पठानिया ने क्षेत्रवासियों से रेसवेज निर्माण कर इस इको-फ्रेंडली व्यवसाय को अपनाने का आह्वान किया है। विपणन सुविधा के लिए पांच मोटरसाइकिलें आइस बॉक्स सहित दी गई हैं और एक अतिरिक्त मोटरसाइकिल भी शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बेहतर मार्केटिंग के लिए शाहपुर और धर्मशाला में दो फिश कियोस्क स्थापित करने का सुझाव भी विभाग को दिया गया है।

स्थानीय परिवार बना प्रेरणा स्रोत
बोह निवासी पप्पू राम, जो पूर्व उपप्रधान भी रह चुके हैं, ने अपनी पत्नी नीलम देवी के साथ 38 लाख रुपए की लागत से ‘बोह वैली फिश फार्म एंड हैचरी’ का निर्माण किया है। उन्हें प्रदेश सरकार से 15 लाख रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक के सहयोग से यह संभव हो पाया है। हैचरी में ट्राउट का बीज डाला जा चुका है और उन्हें विश्वास है कि यह उद्यम उनके परिवार की आजीविका को और मजबूत करेगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नौकरी के लिए भटकने की बजाय स्वरोजगार अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

मत्स्य विभाग का सहयोग
सहायक निदेशक मत्स्य विभाग पालमपुर डॉ. राकेश कुमार के अनुसार, धारकंडी घाटी में ट्राउट पालन की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में 15 से 20 लोगों ने अपने-अपने तालाब बनाकर ट्राउट उत्पादन शुरू कर दिया है। नई हैचरी के निर्माण से अब ट्राउट का गुणवत्तायुक्त बीज स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होगा। इस हैचरी के लिए डेनमार्क से उच्च नस्ल का ट्राउट बीज मंगवाया गया है।

परियोजना के अंतर्गत 3.03 करोड़ रुपए में से अब तक 211.50 लाख रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें 34 ट्राउट रेसवेज, 6 मोटरसाइकिल विद आइस बॉक्स और 2 फिश कियोस्क शामिल हैं। ट्राउट क्लस्टर के तहत 20 रेसवेज, 4 मोटरसाइकिलें और 1 फिश कियोस्क पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष कार्य प्रगति पर है। 88.50 लाख रुपये की उपदान राशि जारी की जा चुकी है और शेष राशि कार्य पूर्ण होने पर प्रदान की जाएगी।

विकास की नई दिशा
बोह घाटी में ट्राउट हब की स्थापना से जहां एक ओर पर्यटन को नई गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और सरकारी सहयोग से धारकंडी क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम बढ़ा रहा है। बोह घाटी अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि और स्वरोजगार का उभरता केंद्र बनने जा रही है।

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