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सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, वरना होगा धरना-आंदोलन

हिमाचल में आर-पार की जंग: जिला परिषद और बीडीसी अध्यक्षों की नियुक्ति में देरी पर भड़की भाजपा, सड़कों पर उतरने की तैयारी

धर्मशाला।

हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद, बीडीसी और शहरी निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव में हो रही देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी कांगड़ा ने आज शनिवार को प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता विपिन सिंह परमार ने सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के अपमान और जनमत को कुचलने का गंभीर आरोप लगाते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। अब देखना यह होगा कि भाजपा के इस कड़े रुख के बाद प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन चुनाव की तिथियों को लेकर क्या कदम उठाता है।

Image: NCTV

लोकतंत्र की मर्यादा को ताक पर रखने का आरोप
भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव संपन्न हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सरकार जानबूझकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव की तिथि घोषित नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार हार के डर से नियमों में बार-बार बदलाव कर रही है ताकि जोड़-तोड़ के जरिए लाभ कमाया जा सके। परमार ने कहा कि यह न केवल जनादेश का अपमान है, बल्कि चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन भी है।

सत्ता के दुरुपयोग और डराने-धमकाने की राजनीति
विपिन परमार ने सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा समर्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया, तो भाजपा जिला प्रशासन के विरुद्ध डीसी कार्यालय परिसर में उग्र आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की तानाशाही कार्यप्रणाली के विरुद्ध है।

भाजपा का निर्णायक कदम: प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने बताया कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को स्पष्ट कर दिया है। निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाना और चुनाव प्रक्रिया में देरी करना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। सुधीर शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय नहीं लिया गया, तो भाजपा जनहित की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।

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