राजनीतिहिमाचल प्रदेश

45 हजार करोड़ का कर्ज फिर भी खजाना खाली: राकेश शर्मा

कहा, सुक्खू सरकार ने प्रदेश को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से बर्बाद किया

धर्मशाला।

कांग्रेस की सुक्खू सरकार पर हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता राकेश शर्मा ने प्रदेश को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि बेरोजगारों को कोई स्थाई नौकरी नहीं दी गई, विकास कार्य ठप हैं। ऐसे में हिमाचल जैसा पहाड़ी प्रदेश वित्तीय आपातकाल की तरफ जा रहा है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि सुक्खू सरकार द्वारा 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने के बावजूद प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब है। सुक्खू सरकार सत्ता में आने के बाद लगातार जनविरोधी निर्णय ले रही हैं।

राकेश शर्मा ने कहा कि सुक्खू सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा आज पूरे प्रदेश की जनता भुगत रही है। प्रदेश का कोई जिला ऐसा नहीं है, जहां पर लगातार धरने प्रदर्शन न हो रहे हों। कांग्रेस ने चुनाव में केवल वोट लेने के लिए जो गारंटियां प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और किसान को दी थी जो आज तक पूरी नहीं हुई हैं। कांग्रेस सरकार ने सभी गारंटियों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, लेकिन जो गारंटियां नहीं दी थी, वो संस्थान बंद करके और जनविरोधी निर्णय लेकर दिखाया। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के देय भुगतान पर रोक लगा कर बैठ गई है।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने आपदा के दौरान 4,500 करोड़ रुपए की घोषणा की थी, लेकिन केवल 165 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं। आपदा राहत के नाम पर खनन माफिया को फायदा पहुंचाया गया, लेकिन आम जनता को मदद नहीं मिली। पेंशन और एरियर भुगतान में देरी ने कर्मचारियों को निराश किया है।

राकेश शर्मा ने कहा कि हिमाचल का खजाना फिजूलखर्ची और सीपीएस पदों पर बर्बाद किया गया, जबकि जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सरकार की घोषणाओं को खोखला बताते हुए कहा कि महिलाओं को 1500 रुपए महीना देने का वादा कागजों तक सीमित है। सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार उद्योगों को बर्बाद करने और उन्हें प्रदेश से बाहर भेजने के लिए योजना बंद तरीके से कम कर रही है। एक तरफ सरकार के तुगलकी फैसला उद्योगों को आर्थिक असुरक्षा दे रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर बेखौफ माफिया तंत्र उद्योगपतियों को डरा रहा है। इस वजह से उद्योगपति अब हिमाचल प्रदेश छोड़कर जाना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर माफिया किसकी शह पर काम कर रहे हैं? कौन इन माफियाओं को संरक्षण दे रहा है?

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