‘ताजमहल का टेंडर’ के ज़रिए सरकारी तंत्र पर तीखा कटाक्ष
आज अगर शाहजहां बनवाते ताजमहल, तो क्या होता? NSD के कलाकारों ने व्यवस्था की विसंगतियों पर बिखेरा व्यंग्य का रंग
धर्मशाला।
देवभूमि के सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयां देते हुए राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के अंतरंग सभागार में ‘हिम रंग षष्ठी ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव’ का शानदार आगाज हुआ। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल नई दिल्ली और हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय उत्सव के पहले दिन दर्शकों को विश्वस्तरीय रंगमंच का अनुभव मिला। आज कलाकारों ने ‘ताजमहल का टेंडर’ का मंचन किया। ‘प्रहसन’ (फार्स) शैली में बुना गया यह नाटक आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था, लालफीताशाही और भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार करता है।

28 वर्षों से अनवरत लोकप्रियता का जादू
अजय शुक्ल द्वारा लिखित और एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी के मधुर संगीत से सजी यह प्रस्तुति पिछले करीब तीन दशकों से भारतीय रंगमंच की पहचान बनी हुई है। ‘प्रहसन’ (फार्स) शैली में बुना गया यह नाटक आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था, लालफीताशाही और भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार करता है। नाटक की मूल परिकल्पना दर्शकों को सोचने पर विवश कर देती है- यदि सम्राट शाहजहां आज के युग में होते और उन्हें ताजमहल बनवाना होता, तो क्या वे आधुनिक सरकारी तंत्र और ‘टेंडर’ की जटिलताओं के बीच इसे पूरा कर पाते?

मंच पर जीवंत हुआ इतिहास और व्यंग्य
मंच पर अजय कुमार ने शाहजहां की बेबसी और गरिमा को बखूबी जिया, वहीं मुमताज के रूप में अप्सरा और गुप्ता जी के किरदार में सुमन कुमार ने अपने अभिनय से दर्शकों को लोटपोट कर दिया। इप्सिता पूनम, हीरा लाल, आलोक, आशुतोष, नवीन, नज़ीबुर रहमान और शिल्पा (शाहजहां की बेटी) ने अपने सशक्त अभिनय और सटीक कॉमिक टाइमिंग से नाटक में प्राण फूंक दिए। जीवंत रंगभाषा और प्रभावी पार्श्व संगीत ने दर्शकों को अंत तक अपनी सीटों से बांधे रखा।

रंगमंडल के 60 गौरवशाली वर्ष
यह नाट्योत्सव एनएसडी रंगमंडल की स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘रंग षष्ठी’ समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस हीरक जयंती वर्ष के अवसर पर रंगमंडल देश के विभिन्न अंचलों में अपनी श्रेष्ठ कलाकृतियों को जन-जन तक पहुँचा रहा है।

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि, मंडलायुक्त (कांगड़ा) संदीप कुमार द्वारा किया गया। उद्घाटन संध्या की शुरुआत एनएसडी रंगमंडल की कालजयी और बेहद लोकप्रिय प्रस्तुति ‘ताजमहल का टेंडर’ के साथ हुई। इस गरिमामयी अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी प्रभात शर्मा, उप निदेशक (भाषा एवं संस्कृति) बिहारी लाल शर्मा, सहायक निदेशक अनिल हारटा, क्यूरेटर रितु मनकोटिया सहित कला जगत की अनेक हस्तियां उपस्थित रहीं।


