स्वर्ण पदकों का ‘पंच’ और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक: हिमाचल के यशोवर्धन ने योगासन में रचा इतिहास
17 साल की उम्र में यशोवर्धन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया तिरंगा, युवाओं के लिए बने मिसाल
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश के होनहार युवा योगासन खिलाड़ी यशोवर्धन अत्री ने अपनी विलक्षण प्रतिभा और कठिन परिश्रम के दम पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रदेश व देश का नाम गौरव से ऊंचा किया है। हमीरपुर के वार्ड नंबर एक के निवासी और हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, विकासनगर में 12वीं कक्षा के छात्र 17 वर्षीय यशोवर्धन पिछले नौ वर्षों से योग साधना में लीन हैं। उनकी निरंतर साधना का ही परिणाम है कि आज वे जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पदकों की झड़ी लगा रहे हैं।
स्वर्ण पदकों का ‘पंच’ और शानदार खेल सत्र
खेल सत्र 2024-25 यशोवर्धन के लिए उपलब्धियों भरा रहा है। उन्होंने स्टेट स्कूल गेम्स (14-19 आयु वर्ग) में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इसके अतिरिक्त, भारत योगासन से संबद्ध स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक लगाने के साथ-साथ वाई.एफ.आई. राज्य चैंपियनशिप में भी सोने पर कब्जा जमाया। इस तरह उन्होंने एक ही सत्र में स्वर्ण पदकों का ‘पंच’ (पांच स्वर्ण) पूरा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर छोड़ी छाप
राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाते हुए यशोवर्धन ने कोलकाता में आयोजित एस.जी.एफ.आई. गेम्स और विजयवाड़ा में आयोजित छठी जूनियर नेशनल योगासन प्रतियोगिता के फाइनल में शीर्ष चार में स्थान बनाकर सबको चकित कर दिया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही, जहां उन्होंने सिंगापुर में आयोजित ’10वीं एशियाई योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप-2025′ में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया और तिरंगे का मान बढ़ाया।
लक्ष्य: एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स
अपनी सफलता का श्रेय प्रशिक्षकों और निरंतर अभ्यास को देते हुए यशोवर्धन ने बताया कि वे प्रतिदिन 3 से 4 घंटे कड़ा अभ्यास करते हैं। उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
विरासत में मिला खेल कौशल
यशोवर्धन को खेल की प्रेरणा अपने परिवार से ही मिली है। उनके पिता, नरेंद्र अत्री, स्वयं प्रदेश के उत्कृष्ट खिलाड़ी रहे हैं और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष के रूप में खेलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यशोवर्धन की इस उपलब्धि ने न केवल उनके विद्यालय और जिले को गौरवान्वित किया है, बल्कि वे आज प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए फिटनेस और योग के प्रति एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरे हैं।


