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किशाऊ परियोजना में केंद्र ने हिमाचलियों के हितों का रखा ध्यान: बिक्रम ठाकुर

किशाऊ परियोजना में केंद्र ने हिमाचलियों के हितों का रखा ध्यान: बिक्रम ठाकुर

धर्मशाला।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयानों पर पूर्व मंत्री एवं जसवां-प्रागपुर के विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि किशाऊ परियोजना आज की चर्चा नहीं है, बल्कि वर्ष 1994 से लंबित एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। दशकों तक विभिन्न राज्यों के बीच सहमति, वित्तीय दायित्व और लाभों के बंटवारे से जुड़े विषयों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और हिमाचल सहित सभी सहभागी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने हिमाचलियों के हितों का विशेष ध्यान रखते हुए राजनीति से ऊपर उठकर काम किया और वर्षों से लंबित गतिरोध को दूर करने की दिशा में ठोस पहल की।

बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि किशाऊ परियोजना केवल हिमाचल प्रदेश की नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सहित छह राज्यों के साझा हितों से जुड़ी राष्ट्रीय परियोजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सभी संबंधित राज्यों को एक मंच पर लाकर संवाद और सहमति का वातावरण तैयार किया। यही कारण है कि दशकों से लंबित परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता अब साफ हुआ है।

विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रदेश के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से रखा, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार ने हिमाचल की चिंताओं और शर्तों को गंभीरता से सुना और प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखते हुए सहमति बनाने की दिशा में काम किया। यह केंद्र की उस कार्यशैली को दर्शाता है जिसमें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्यों के हितों को प्राथमिकता दी जाती है।

बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने बयानों में इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय लेने के बजाय यह स्वीकार करें कि इतने बड़े अंतरराज्यीय विषय का समाधान केवल एक राज्य या एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं था। केंद्र सरकार ने सभी पक्षों को साथ लाकर समाधान का रास्ता खोला और हिमाचल के हितों का भी पूरा ध्यान रखा। केंद्र सरकार परियोजना के लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार को उठाने की व्यवस्था कर रही है, जबकि शेष भार सहभागी राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना से लगभग 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और लगभग 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य है। यह हिमाचल सहित संबंधित राज्यों के लिए जल, ऊर्जा और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है।

बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि केंद्र और राज्य के बीच सहयोग को राजनीतिक श्रेय की प्रतिस्पर्धा में बदलने के बजाय हिमाचल के हित में किए जा रहे प्रयासों को स्वीकार करना चाहिए। मोदी सरकार ने राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर हिमाचल के हितों को ध्यान में रखा है और किशाऊ परियोजना इसका उदाहरण है। अब आवश्यकता श्रेय लेने की राजनीति की नहीं, बल्कि परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की है। वर्ष 1994 से लंबित इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र, हिमाचल और सभी सहभागी राज्यों को मिलकर काम करना होगा, ताकि हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों की जनता को इसका लाभ मिल सके।

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