धर्मशाला नगर निगम में ‘सियासी महाभारत’
मेयर चुनाव से पहले पार्षदों पर अतिक्रमण के वार-पलटवार, किस पर गिरेगी गाज?
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी कहे जाने वाले धर्मशाला में नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पहले सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। शहर में एक ऐसा ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ शुरू हुआ है, जिसकी मिसाल पहले कभी नहीं देखी गई। भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी यह ‘सियासी अखाड़ा’ अब आरोपों और शिकायतों के जाल में उलझ गया है।
भाजपा पार्षदों पर अयोग्यता की तलवार
नाटक की शुरुआत सोमवार से हुई, जब नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद भाजपा के तीन नव निर्वाचित पार्षदों पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर आरोप लगे। एसडीएम धर्मशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त कांगड़ा ने शहरी विकास विभाग को इन पार्षदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 8 (L) के तहत इन पार्षदों पर अयोग्यता का खतरा मंडरा रहा है। इस खबर ने शहर के सियासी गलियारों में ‘शेयर बाजार’ जैसी हलचल पैदा कर दी है।
भाजपा का जोरदार पलटवार
भाजपा ने भी इस हमले का जवाब आक्रामक अंदाज में दिया। मंगलवार को भाजपा मंडल अध्यक्ष डॉ. विशाल नैहरिया ने मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस के तीन पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी पर सरकारी भूमि कब्जाने का आरोप जड़ दिया। डॉ नैहरिया ने न केवल उपायुक्त को शिकायत सौंपी, बल्कि इस मामले की गूंज दिल्ली तक पहुंचा दी। शिकायत की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और राज्य के आला अधिकारियों को भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
चुनाव से पहले ‘खेला’ होने की सुगबुगाहट
इस बीच, बुधवार एक जुलाई दोपहर 3 बजे मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की घोषणा कर दी गई है। उपायुक्त की ओर से स्थानीय विधायक सुधीर शर्मा को इस संबंध में पत्र जारी किया जा चुका है, लेकिन दिलचस्प मोड़ तब आया जब विधायक सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर जनता के नाम एक रहस्यमयी संदेश साझा किया। इस संदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है।
बहुमत बनाम बॉयकाट की रणनीति
सूत्रों की मानें तो संख्या बल के हिसाब से बीजेपी का पलड़ा भारी है और पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम भी तय कर लिए हैं। वहीं, दूसरी तरफ खबर है कि कांग्रेस इस पूरी प्रक्रिया से दूरी बना सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस पार्षदों को चुनाव में हिस्सा न लेने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सबकी नजरें बुधवार दोपहर 3 बजे होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं। क्या धर्मशाला में अतिक्रमण के ये आरोप किसी का राजनीतिक भविष्य खत्म करेंगे या फिर यह सिर्फ चुनाव जीतने की एक बिसात भर है? धर्मशाला में चल रहा यह ‘सियासी खेला’ अब किस करवट बैठेगा, इसका फैसला चंद घंटों में हो जाएगा।


