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केंद्र ने पोंग डैम झील वेटलैंड और रेणुका वेटलैंड संरक्षण को दिए 5.73 करोड़: अनुराग

ये वेटलैंड्स हिमालयी जैव-विविधता कॉरिडोर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण

शिमला।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के लोकसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से हिमाचल प्रदेश में वेटलैंड्स के संरक्षण, फंडिंग और वैज्ञानिक निगरानी के बारे में प्रश्न किया। इस पर मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विस्तृत जवाब देते हुए राज्य के वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे।

अनुराग ठाकुर ने बताया कि हिमाचल में तीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर साइट्स पोंग डैम झील, रेणुका वेटलैंड और चंद्रताल वेटलैंड हैं। इनमें सबसे बड़ी पोंग डैम झील है, जिसे वर्ष 2002 में रामसर साइट घोषित किया गया था। रेणुका वेटलैंड और चंद्रताल वेटलैंड दोनों को वर्ष 2005 में रामसर दर्जा मिला था। ये वेटलैंड्स हिमालयी जैव-विविधता कॉरिडोर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं का घर हैं।

अनुराग ठाकुर ने बताया कि फंडिंग और संरक्षण उपायों के महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (NPCA) के तहत हिमाचल प्रदेश सरकार को पर्याप्त वित्तीय सहायता जारी की गई है। पोंग डैम झील के लिए केंद्र का हिस्सा 3.14 करोड़ रुपए स्वीकृत किया गया है, जबकि रेणुका वेटलैंड के लिए 2.59 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इन धनराशियों का उपयोग विभिन्न संरक्षण एवं प्रबंधन गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिनमें अपशिष्ट जल का अवरोधन, तटबंध संरक्षण, झील-तट विकास, डिसिल्टिंग एवं डी-वीडिंग के माध्यम से स्थानीय सफाई, वर्षा जल प्रबंधन, बायोरेमेडिएशन, जलग्रहण क्षेत्र उपचार, बायो-फेंसिंग, मत्स्य पालन विकास, खरपतवार नियंत्रण, जैव-विविधता संरक्षण तथा सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम शामिल हैं”

दीर्घकालिक योजना के संबंध में सरकार ने बताया कि राज्य के सभी तीन रामसर साइट्स के लिए पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजनाएं (Integrated Management Plans-IMPs) तैयार की गई हैं। ये योजनाएं आवास संरक्षण को मजबूत करने, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और जलवायु लचीलापन विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं। जिला स्तरीय वेटलैंड समितियों (District Level Wetland Committees-DWCs) के लिए नियमित ओरिएंटेशन एवं प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे बहु-विभागीय दृष्टिकोण को बढ़ावा मिल रहा है।

मंत्रालय की राष्ट्रीय वेटलैंड समिति नीति एवं कार्य कार्यक्रमों पर सलाह देती रहती है, तथा वेटलैंड्स (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत राज्य वेटलैंड प्राधिकरण गठित किए गए हैं। संरक्षण प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी एक आधार स्तंभ बनी हुई है, जिसमें मत्स्यजीवियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और विश्व वेटलैंड दिवस के अवसर पर छात्रों, शिक्षकों तथा स्थानीय समुदायों को शामिल कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

लोकसभा में अनुराग ठाकुर के हस्तक्षेप ने हिमाचल प्रदेश के वेटलैंड्स की पारिस्थितिक संपदा पर नया ध्यान आकर्षित किया है तथा भावी पीढ़ियों के लिए इनके संरक्षण में निरंतर एवं बढ़ी हुई निवेश की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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