ग्राउंड रिपोर्ट: ‘भ्रष्टाचार’ की दरारें!…. 8 लाख की सुरक्षा दीवार पहली बरसात में ही धराशायी!
मानसून की आहट के साथ ही स्थानीय निवासियों के जेहन में पिछले साल के जख्म होने लगे ताजा
धर्मशाला।
प्रशासनिक अनदेखी और सिस्टम की सुस्ती ने एक बार फिर धर्मशाला-सुधेड़ मार्ग को तबाही की कगार पर खड़ा कर दिया है। मानसून की आहट के साथ ही स्थानीय निवासियों के जेहन में पिछले साल के जख्म ताजा हो गए हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली अब भी सवालों के घेरे में है।
सुरक्षा के नाम पर महज खानापूर्ति?
धर्मशाला के सुधेड़ क्षेत्र में भूस्खलन और मलबे को रोकने के लिए विभाग ने लगभग 8 लाख रुपए की लागत से एक ‘ब्रेस्ट वॉल’ (सुरक्षा दीवार) का निर्माण कार्य शुरू किया था। हैरानी की बात यह है कि करीब 2.6 मीटर ऊंची यह दीवार मानसून की पहली परीक्षा से पहले ही जवाब दे गई है। दीवार में ऊपर से नीचे तक दो बड़ी दरारें आ चुकी हैं, जो घटिया निर्माण सामग्री या तकनीकी लापरवाही की ओर सीधा इशारा कर रही हैं।
अधिकारियों की बेरुखी और विभागों की खींचतान
मामले की गंभीरता को लेकर जब लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) चंद्र शेखर से बात की तो उन्होंने पहले तो अनभिज्ञता जताई और फिर सारा दोष जल शक्ति विभाग की पाइप लाइन में लीकेज और बारिश पर मढ़ दिया। जल शक्ति विभाग की पानी की लाइन लीक होने के कारण वहां पर पानी रिस रहा है। संबंधित विभाग को SDO ने कन्वे कर दिया है। जब मैंने उनसे पूछा कि क्या आपने मौका मुआयना किया तो कहा, नहीं। लेकिन SDO शुभांक गर्ग को डायरेक्शन दी है। सड़क को ठीक किया जाएगा। लेकिन आपको बताते चलें कि SDO गर्ग ने इस ब्रैस्ट वॉल के लिए नहीं बल्कि सड़क पर आ रहे मलबे को लेकर मौका मुआयना किया था। क्योंकि आज बुधवार सुबह सुधेड़ के काफी लोग एक्सईएन चंद्र शेखर से मिलकर सड़क पर पसर रहे मलबे के कारण आज रही दिक्कत से अवगत कराया था। ठेकेदार की मशीनरी दो दिन काम करती और फिर चार दिन नहीं। इस पर एक्सईएन चंद्र शेखर ने बताया कि उक्त मामले में उन्होंने संबंधित ठेकेदार से बात की लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। वहीं, संबंधित ठेकेदार का कहना है कि विभाग की ओर से अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।
इतिहास से सबक लेने में नाकाम प्रशासन
आपको याद दिला दें कि 24 अगस्त 2025 को इसी क्षेत्र यानि HRTC वर्कशॉप के पीछे सुधेड़ रोड पर भारी भूस्खलन के कारण एक बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। उस भयावह मंजर के बाद डीसी हेमराज बैरवा सहित तमाम आला अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया था और स्थायी समाधान का आश्वासन दिया था। लेकिन आज, महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आक्रोशित ग्रामीण और भविष्य का डर
आज बुधवार को सुधेड़ के कुछ बाशिंदों ने एक बार फिर PWD कार्यालय पहुंचकर अधिशासी अभियंता को अपनी आपबीती सुनाई। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की मशीनरी कभी काम करती है और कभी गायब हो जाती है। मलबे के कारण सड़क पर वाहनों का चलना दूभर हो गया है और सड़क की दयनीय स्थिति से कभी भी कोई चोटिल हो सकता है।
अगर निर्माण कार्य में आई इन दरारों पर समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया, तो मानसून में होने वाली तेज बारिश से किसी भी जनहानि का जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है? क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ी इस रिपोर्ट को लेकर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं।


