424 करोड़ के सौदे में भ्रष्टाचार की बू: संजय शर्मा
HRTC की 297 इलेक्ट्रिक बसों के ₹424.01 करोड़ के सौदे पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश में HRTC की 297 इलेक्ट्रिक बसों को लेकर हुआ 424.01 करोड़ रुपए का सौदा अब कई सवाल खड़े कर रहा है। सरकार इसे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि इस पूरे सौदे में बसों की खरीद पर कितना पैसा खर्च होना है और अगले 12 वर्षों के रखरखाव पर कितना भुगतान किया जाएगा?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने कहा कि ओलेक्ट्रा कंपनी को दिया गया यह ऑर्डर केवल बसों की खरीद का मामला नहीं है। इसमें बसों की आपूर्ति के साथ लंबे समय का रखरखाव भी शामिल है। ऐसे में सरकार को पूरी लागत का ब्यौरा जनता के सामने रखना चाहिए। केवल कुल 424.01 करोड़ रुपए की राशि बताकर जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती।
संजय शर्मा ने कहा कि समाचार पत्रों में प्रकाशित जानकारी के अनुसार बसों के संचालन और रखरखाव के लिए शुरुआती भुगतान 5.31 रुपए प्रति किलोमीटर बताया गया है, जो आगे चलकर 18 रुपए प्रति किलोमीटर तक पहुंच सकता है। साथ ही प्रति बस प्रतिदिन न्यूनतम 120 किलोमीटर संचालन की शर्त का भी उल्लेख किया गया है। यदि ये दरें और शर्तें अनुबंध में इसी प्रकार दर्ज हैं, तो सरकार को इनका पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
संजय शर्मा ने कहा कि 297 बसों के हिसाब से प्रतिदिन 35,640 किलोमीटर का संचालन बनता है। शुरुआती 5.31 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से ही यह राशि लगभग 1.89 रुपए लाख प्रतिदिन बैठती है। सालभर में यह करीब 6.91 करोड़ रुपए हो जाती है। यह गणना प्रकाशित दर और न्यूनतम किलोमीटर की शर्त पर आधारित है। ऐसे में जब भुगतान की दर आगे बढ़कर 18 रुपए प्रति किलोमीटर होने की बात सामने आई है, तो सरकार को बताना चाहिए कि 12 वर्षों में रखरखाव पर कुल कितना खर्च आएगा।
संजय शर्मा ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। यहां कई सड़कें संकरी हैं, अनेक मार्गों पर तीखे मोड़ हैं और पहाड़ी रास्तों पर बसों का संचालन आसान नहीं है। ऐसे में रखरखाव, तकनीकी खराबी और बसों को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह अनुबंध में साफ होना चाहिए। मीडिया में प्रकाशित जानकारी में कुछ तकनीकी नुकसान की जिम्मेदारी HRTC पर आने की बात भी कही गई है। सरकार इस पर स्थिति स्पष्ट करे।
संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश पहले ही आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। HRTC की वित्तीय स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे समय में सरकार को हर बड़े खर्च में पारदर्शिता रखनी चाहिए। इलेक्ट्रिक बसों का स्वागत है, लेकिन पर्यावरण और सार्वजनिक परिवहन के नाम पर किए जा रहे खर्च का हिसाब देना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार इन सवालों का जवाब दे:
1. 424.01 करोड़ रुपए के कुल सौदे में बसों की वास्तविक कीमत कितनी है?
2. चार्जिंग व्यवस्था और अन्य उपकरणों पर कितना खर्च होगा?
3. 12 वर्षों के रखरखाव की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
4. 5.31 रुपए से 18 रुपए प्रति किलोमीटर भुगतान की शर्तें क्या हैं?
5. बसों में तकनीकी खराबी या सड़क की परिस्थितियों से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी कंपनी की होगी या HRTC की?
6. बसों के निर्धारित किलोमीटर पूरे न होने की स्थिति में भुगतान कैसे तय होगा?
7. क्या सरकार पूरा अनुबंध और उसकी वित्तीय शर्तें सार्वजनिक करने को तैयार है?
8. संजय शर्मा ने मांग की कि प्रदेश सरकार इस सौदे पर श्वेत पत्र जारी करे और पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच करवाए। बसों की खरीद, रखरखाव, चार्जिंग व्यवस्था और भुगतान की सभी शर्तें जनता के सामने रखी जाएं।
संजय शर्मा ने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह पैसा किसी नेता या सरकार की जेब से नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की मेहनत की कमाई और सरकारी खजाने से खर्च हो रहा है। इसलिए हर रुपए का हिसाब देना होगा। यदि सरकार के पास इस सौदे में सब कुछ सही होने के पुख्ता दस्तावेज हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट क्यों? भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच उठाती रहेगी और सरकार से पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करेगी।



