धर्मशाला में ‘बाबूजी’ के साथ ‘हिम रंग षष्ठी’ का भावुक समापन
कलाकारों के संघर्ष की दास्तां ने दर्शकों को झकझोरा
धर्मशाला।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल की और से आयोजित ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव ‘हिम रंग षष्ठी’ के धर्मशाला पड़ाव का रविवार को मर्मस्पर्शी समापन हो गया। उत्सव के अंतिम दिन मंचित नाटक ‘बाबूजी’ ने कलाकारों के सामाजिक संघर्ष और कला के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस गरिमामयी मौके पर कांगड़ा जिला के अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

राजकीय महाविद्यालय के अंतरंग सभागार में प्रसिद्ध लेखक मिथिलेश्वर की कहानी पर आधारित नाटक ‘बाबूजी’ का मंचन किया गया। विभांशु वैभव द्वारा रूपांतरित और रंगमंडल प्रमुख राजेश सिंह द्वारा निर्देशित इस नाटक ने उत्तर भारत की पारंपरिक ‘नौटंकी शैली’ को पुनर्जीवित कर दिया। सजीव संगीत और लोकधर्मी प्रस्तुति के बीच कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कलाकार राजेश सिंह, शिव प्रसाद, पूनम दहिया और अन्य ने अपनी प्रतिभा से समां बांध दिया।

अस्तित्व की जंग लड़ता एक ‘बाबूजी’
नाटक की कहानी लल्लन सिंह उर्फ ‘बाबूजी’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सामाजिक तिरस्कार, पारिवारिक विखंडन और आर्थिक तंगी के बावजूद अपने भीतर के कलाकार को जीवित रखता है। यह नाटक केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत फनकारों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें समाज अक्सर हाशिए पर धकेल देता है। नाटक ने गहरा सवाल उठाया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त और पवित्र माध्यम है।

अगला पड़ाव: शिमला
उल्लेखनीय है कि यह आयोजन एनएसडी रंगमंडल की स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। धर्मशाला में अपनी सफलता का परचम लहराने के बाद, यह नाट्योत्सव अब हिमाचल की राजधानी शिमला की ओर रुख करेगा, जहाँ मॉल रोड स्थित ऐतिहासिक गेइटी थिएटर में इन चर्चित प्रस्तुतियों का मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभात शर्मा, भाषा एवं संस्कृति विभाग के उप-निदेशक बिहारी लाल शर्मा, सहायक निदेशक अनिल हारटा और जिला लोक संपर्क अधिकारी विनय शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


