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राज्यसभा सीट: “दुबई में डील, दिल्ली में लगी अंतिम मुहर”

पूर्व विधायक राजेंद्र राणा का कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा आरोप

शिमला।

हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर पूरी प्रक्रिया बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में तय की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सीट की डील पहले दुबई में तय हुई और बाद में दिल्ली के रेडिसन होटल के बंद कमरे में उस पर अंतिम मुहर लगाई गई।

राजेंद्र राणा ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री 1 मार्च को दिल्ली दौरे पर गए थे और आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार उन्हें 2 मार्च को दिल्ली से शिमला लौटना था, लेकिन तय कार्यक्रम के बावजूद मुख्यमंत्री शिमला नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि लगभग 24 घंटे तक मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए, जिससे पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्यमंत्री आखिर 24 घंटे तक कहां थे
राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि इन 24 घंटों के दौरान मुख्यमंत्री दिल्ली के रेडिसन होटल में ठहरे रहे, जबकि उनके आधिकारिक कार्यक्रम में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया। इसी दौरान राज्यसभा सीट को लेकर बंद कमरे में पूरी डील फाइनल की गई। उनका कहना था कि कांग्रेस द्वारा घोषित प्रत्याशी अनुराग शर्मा और मुख्यमंत्री पहले ही दुबई में इस सीट को लेकर समझौता कर चुके थे और दिल्ली के रेडिसन होटल में उस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। राणा ने कहा कि यह सब कुछ इतनी गोपनीयता में किया गया कि किसी को यह तक नहीं बताया गया कि मुख्यमंत्री आखिर 24 घंटे तक कहां थे।

राजेंद्र राणा ने कांग्रेस के उस दावे पर भी सवाल उठाए जिसमें प्रत्याशी को आम कार्यकर्ता बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को आम कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक है और उसके पास लाखों रुपए की लग्जरी गाड़ियां हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह दावा पूरी तरह से जनता को गुमराह करने वाला है।

राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रत्याशी के चुनावी हलफनामे में भी कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। राणा के अनुसार हलफनामे में पत्नी के नाम दर्ज संपत्ति में लाखों रुपए का अंतर दिखाई देता है, जबकि स्वयं की संपत्ति के आंकड़ों में भी करीब 99 लाख रुपए का फर्क सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह अंतर साधारण नहीं बल्कि बड़े स्तर की गड़बड़ी की ओर संकेत करता है।

तीन वर्षों के दौरान सरकार की ओर से करोड़ों के टेंडर
राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रत्याशी द्वारा घोषित कुल संपत्ति 22 करोड़ 43 लाख रुपए से अधिक बताई गई है, जिसमें बड़ी राशि बैंक एफडी के रूप में दर्शाई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री किस आधार पर ऐसे व्यक्ति को आम कार्यकर्ता बता रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यही वह व्यक्ति है जो मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकार की ओर से करोड़ों रुपए के कई टेंडर भी इन्हें दिए गए हैं। राणा ने कहा कि इससे पूरे मामले में राजनीतिक पक्षपात और सांठगांठ की आशंका और मजबूत हो जाती है।

राजेंद्र राणा ने कहा कि पूरे घटनाक्रम में कई गंभीर अनियमितताएं और तथ्यों को छिपाने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि सारे मामले को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए, वही पर केंद्र सरकार से व केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी मांग की है कि राज्यसभा के इस चुनाव में भारी लेनदेन की आशंका को देखते हुए जो साक्ष्य पाए गए हैं सरकार तुरंत इसकी केंद्रीय एजेंसी से जांच करवाई जाए।

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