हिमाचल में सर्पदंश से मौतों को शून्य करने के लक्ष्य को लेकर रणनीति तैयार
जोनल अस्पताल धर्मशाला में बनी रणनीति, जागरूकता और समय पर उपचार पर जोर
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश में सर्पदंश (स्नेकबाइट) से होने वाली मौतों को शून्य तक लाने के उद्देश्य से शनिवार को जोनल अस्पताल धर्मशाला के सभागार में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य, वन, शिक्षा, सिंचाई, पशुपालन, स्थानीय निकाय सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सर्पदंश की रोकथाम, लोगों में जागरूकता बढ़ाना और समय पर प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करना रहा।
अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, कोच्चि के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जयदीप सी. मेनन ने बताया कि यह परियोजना आईसीएमआर के सहयोग से देश के सात राज्यों हिमाचल प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और असम में संचालित की जा रही है। इसका लक्ष्य सामुदायिक जागरूकता, स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और स्कूलों के माध्यम से लोगों को शिक्षित कर सर्पदंश से होने वाली मौतों को शून्य तक पहुंचाना है।
डॉ. जयदीप सी. मेनन ने बताया कि हिमाचल में इस परियोजना की शुरुआत कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी और नूरपुर ब्लॉकों से की गई है, जिसे आगे पूरे कांगड़ा और फिर पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है। सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या पारंपरिक उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए, क्योंकि एंटी स्नेक वेनम (ASV) ही इसका प्रभावी इलाज है। यदि तीन घंटे के भीतर जरूरतमंद मरीज को ASV मिल जाए तो मृत्यु की संभावना काफी कम हो जाती है।
डॉ. मेनन ने कहा कि हिमाचल का दुर्गम पर्वतीय भूभाग सबसे बड़ी चुनौती है। दूरदराज क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में कई घंटे लग जाते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। डॉ. जयदीप सी. मेनन ने सुझाव दिया कि एंबुलेंस में ही ASV उपलब्ध कराकर उपचार की शुरुआत की जाए, जिससे कई जानें बचाई जा सकती हैं।
डॉ. जयदीप सी. मेनन ने बताया कि हिमाचल में पाए जाने वाले कुछ विषैले सांप, जैसे ग्रीन माउंटेन पिट वाइपर, वर्तमान एंटी स्नेक वेनम के दायरे में पूरी तरह शामिल नहीं हैं। ऐसे में प्रदेश की जरूरतों के अनुरूप विशेष एंटी स्नेक वेनम विकसित करने की दिशा में भी पहल की जानी चाहिए। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए और सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।


