8 लाख रुपए की लागत और ‘जीरो’ प्लानिंग!
एक्सईएन की चुप्पी और टूटती दीवारें: धर्मशाला-सुधेड़ रोड की बदहाली पर कब जागेगा प्रशासन?
धर्मशाला।
धर्मशाला-सुधेड़ मार्ग की बदहाली और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल अब और गहरे होते जा रहे हैं। बीते 8 जुलाई को हमारी विशेष रिपोर्ट में हमने खुलासा किया था कि कैसे लगभग 8 लाख रुपए की लागत से बनाई जा रही ‘ब्रैस्ट वॉल’ भ्रष्टाचार और तकनीकी लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। विडंबना यह है कि जिस दीवार को सुरक्षा के लिए बनाया जाना था, वह आज खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रही है और सरकारी धन सीधे तौर पर पानी में बहता नजर आ रहा है।
तकनीकी खामी या भारी लापरवाही?
इंजीनियरिंग के सामान्य सिद्धांतों को दरकिनार करते हुए, विभाग ने इस दीवार का निर्माण तो शुरू किया, लेकिन पहाड़ी से लगातार हो रहे पानी के रिसाव (Seepage) को रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए। नतीजा आज सबके सामने है। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि धर्मशाला-सुधेड़ रोड अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है, जिसका खामियाजा रोजाना यहां से गुजरने वाले सैकड़ों वाहन चालकों और राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जब हमने लोक निर्माण विभाग धर्मशाला के अधिशासी अभियंता (XEN) चंद्रशेखर से फ़ोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की यह चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा करती है। अब फ़ोन नहीं उठाने की वजह क्या रही यह हम नहीं जानते हैं।
खबर का आंशिक असर और मौजूदा स्थिति
हमारी खबर प्रसारित होने के बाद संबंधित ठेकेदार हरकत में जरूर आया और सड़क पर पसरे मलबे को हटाने का काम शुरू किया। लेकिन यह केवल ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ के समान है। सड़क अब भी ऊबड़-खाबड़ है और जलभराव के कारण फिसलन बनी हुई है, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा लगातार बना हुआ है।
पंचायत प्रधान ने किया निरीक्षण
हमारी विशेष रिपोर्ट के बाद सुधेड़ पंचायत के प्रधान अजीत नेहरिया ने शनिवार शाम मौके पर पहुंचकर इस दीवार का निरीक्षण किया।


