जुगाड़ तंत्र पर भड़के जयराम ठाकुर, बोले ‘जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही सुक्खू सरकार’
हिमाचल में आए दिन सरकारी बसें 'धक्का स्टार्ट' होकर चल रही
शिमला।
हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम की लगातार बदतर होती स्थिति, बसों के खस्ताहाल संचालन और कर्मचारियों व पेंशनरों की अनदेखी पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री के गृह जिले सहित अन्य डिपो में टायरों व अन्य जरूरी सामानों की भारी किल्लत के कारण एक बस के टायर निकालकर दूसरी बस में लगाने और जुगाड़ के सहारे रूटों पर गाड़ियां दौड़ाने की खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि आखिर सरकार जनता की जिंदगी से इस तरह का खतरनाक खिलवाड़ क्यों कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि आज पूरे हिमाचल में परिवहन सेवा का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जहां आए दिन सरकारी बसें ‘धक्का स्टार्ट’ होकर चल रही हैं और टायरों व जरूरी कलपुर्जों के अभाव में दर्जनों बसें कार्यशालाओं में खड़ी धूल फांक रही हैं।
जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में या तो ग्रामीण और महत्वपूर्ण रूटों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है या फिर जबरन खटारा बसों को सड़कों पर भेजकर निर्दोष यात्रियों की जिंदगी को सीधे तौर पर दांव पर लगाया जा रहा है, जिससे बरसात के इन दिनों में किसी भी वक्त कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है। इस व्यवस्था को और अधिक बदतर बनाने में सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियां भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि एक तरफ सड़कों पर बसें कबाड़ बन चुकी हैं। वहीं दूसरी तरफ एचआरटीसी के चालक-परिचालकों और अन्य कर्मचारियों को समय पर वेतन व भत्ते नहीं मिल रहे हैं, जिससे उनका मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। साथ ही, निगम के पेंशनरों की मौजूदा लंबित मांगों और एरियर का भुगतान न होने से बुजुर्ग पूर्व कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है, जो अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री सुक्खू को आगाह किया कि यदि परिवहन निगम की व्यवस्था इसी ढर्रे, लापरवाही और वित्तीय कुप्रबंधन से चलती रही, तो आम जनता का भरोसा इस दशकों पुरानी, भरोसेमंद और जीवन रेखा मानी जाने वाली सरकारी परिवहन सेवा से हमेशा के लिए उठ जाएगा। उन्होंने निगम को लगातार हो रहे भारी घाटे के पीछे कांग्रेस सरकार की गलत, अदूरदर्शी और जनविरोधी नीतियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए तंज कसा कि वातानुकूलित बंद कमरों में बैठकर सिर्फ कागजी नीतियां बनाने, कोरे दावे करने या खोखले फैसले लेने से धरातल पर कभी कोई सुधार नहीं होता है। अगर सरकार सचमुच गंभीर है, तो उसे बंद कमरों से बाहर निकलकर सीधे फील्ड में जाना चाहिए और जमीनी स्तर पर बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।
जयराम ठाकुर ने पुरजोर मांग की कि सुक्खू सरकार तुरंत बजट जारी कर टायरों और स्पेयर पार्ट्स की कमी को दूर करे, बंद पड़े रूटों को बहाल करे और साथ ही कर्मचारियों व पेंशनरों की सभी लंबित जायज मांगों को तुरंत पूरा करे, ताकि हिमाचल की जनता को इस खतरनाक सफर व रोज-रोज की मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से निजात मिल सके और चालक-परिचालकों सहित आम लोगों की जिंदगी को सुरक्षित बनाया जा सके।


