राजनीतिहिमाचल प्रदेश

उच्चतम न्यायालय का फैसला सुक्खू सरकार की असंवैधानिक नीति पर तमाचा : जयराम

कर्मचारी हितैषी होने का ढोल पीटकर कर्मचारियों के साथ अन्याय करने की नीयत से कर रहे काम

शिमला।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आज उच्चतम न्यायालय द्वारा सुक्खू सरकार के हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्तियों की सेवा की शर्तें विधेयक-2024 को असंवैधानिक घोषित करते हुए सुक्खू सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। सुक्खू सरकार द्वारा लाए गए इस संविधान-विरोधी कानून को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले ही रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार ने विशेष याचिका दायर की थी, जिसे न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने खारिज कर दिया। यह मामला देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश एवं अन्य के मामले में आया है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व में हिमाचल के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कर्मचारियों को उनकी वरिष्ठता का लाभ नियुक्ति की तिथि से देने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सुक्खू सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। वहां पर भी सरकार को हार का सामना करना पड़ा। सुक्खू सरकार ने इसके बाद भी हार नहीं मानी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने धर्मशाला के शीतकालीन सत्र-2024 में इस बिल को लाकर फिर से पारित कराया। संख्या बल अधिक होने के कारण भारतीय जनता पार्टी के भारी विरोध के बाद भी यह बिल पारित हुआ। उस समय भी हमने इस कानून का हर स्तर पर विरोध करने के साथ ही इसे असंवैधानिक बताया था और साफ कहा था कि यह बिल न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया जाएगा तथा इससे सदन की गरिमा गिरेगी।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनकी पूरी मंडली प्रदेश और देशभर में घूम-घूमकर खुद को कर्मचारी हितैषी होने का ढोल पीटती है, लेकिन जब भी मौका मिलता है तो कर्मचारियों के साथ हर प्रकार का अन्याय करती है। सरकार का यह फैसला कर्मचारियों के हितों को प्रभावित करने वाला था। मुख्यमंत्री जानबूझकर कर्मचारियों के खिलाफ इस प्रकार का कानून लेकर आए, जिससे उनकी देनदारियां आने वाली सरकारों पर टाली जा सकें। आज भी सरकार की इस कुटिलता पर माननीय उच्च न्यायालय के बाद उच्चतम न्यायालय ने भी पानी फेर दिया।

भारतीय जनता पार्टी सुक्खू सरकार के इस असंवैधानिक फैसले के खारिज होने का स्वागत करती है। यह सरकार एक बार नहीं, बार-बार माननीय न्यायालय में अपने फैसलों और कानूनों को लेकर असंवैधानिक साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार द्वारा बागी विधायकों की पेंशन रोकने के कानून को भी रद्द कर दिया था। इसके पहले हिमाचल द्वारा बनाए गए वाटर कमीशन को असंवैधानिक घोषित किया गया था।

सरकार द्वारा प्रदेश की जनता पर थोपे गए सीपीएस की नियुक्तियों को अवैध घोषित किया गया था। लोगों की बिजली बढ़ाने के फैसले को पलट दिया गया था। पंचायत चुनाव के मामले में अब तक सरकार को छह बार फटकार पड़ चुकी है। प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपए कानूनी लड़ाई में वकीलों पर खर्च किए, जो ज्यादातर मुख्यमंत्री के मित्र और करीबी हैं, परिणाम सबके सामने है। मुख्यमंत्री यह लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक ले गए और वकीलों पर फिर से करोड़ों रुपए खर्च किए।

‘मुख्यमंत्री को हर नाकामी पर भाजपा को कोसने की लत लग गई’
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी हर नाकामी पर भाजपा को कोसने की लत लग गई है। हर बात पर मीडिया के ऊपर भड़कने वाले मुख्यमंत्री आज उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री होने की खबर पर अपनी सफाई दे रहे थे और उसमें भी भाजपा को दोष दे रहे थे। जबकि वह रिपोर्ट एक स्वतंत्र एनजीओ द्वारा बनाई गई थी। उस रिपोर्ट का आधार मुख्यमंत्री द्वारा चुनाव के समय दिया गया एफिडेविट था, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्तियों का हवाला दिया था। भारतीय जनता पार्टी का इससे कोई लेना-देना ही नहीं है। जो एफिडेविट उन्होंने खुद ही दिया था, उसको लेकर उन्हें मीडिया में सफाई देने की क्या जरूरत पड़ रही है?

संशोधन विधेयक-2026 के लोकसभा में पारित
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और उनकी सरकार की पारदर्शी, जवाबदेह एवं युवा-केंद्रित कार्यशैली का एक और महत्वपूर्ण प्रमाण है कि आज विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 लोकसभा में पारित हो गया है। यह ऐतिहासिक कदम करोड़ों मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करेगा तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा और पेपर लीक तथा परीक्षा में धांधली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस जनहितकारी और दूरदर्शी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्र सरकार को हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन। यह निर्णय देश के युवाओं के सपनों की सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!