आज़ाद तिब्बत’ की गूंज: शहीद लोबगा रंगज़ेन के सम्मान में TYC का वैश्विक आंदोलन
'तिब्बत अल्पसंख्यक नहीं, कब्ज़ाया हुआ राष्ट्र है': संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी पर भड़का तिब्बती यूथ कांग्रेस, शुरू किया 'चेन प्रोटेस्ट'
धर्मशाला।
तिब्बती यूथ कांग्रेस (TYC) ने तिब्बत की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक विशाल वैश्विक ‘चेन प्रोटेस्ट’ अभियान का शंखनाद किया है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज (धर्मशाला) में रविवार सुबह से भूख हड़ताल शुरू की गई है। यह आंदोलन अब अपने विभिन्न क्षेत्रीय चैप्टर और समर्थकों के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल रहा है।
तिब्बती यूथ कांग्रेस के अनुसार यह अभियान शहीद लोबगा रंगज़ेन के उस सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सोई हुई अंतरात्मा को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के समक्ष आत्मदाह किया था। उनका यह बलिदान दुनिया को याद दिलाता है कि तिब्बत आज भी एक दमित और कब्ज़ाया हुआ राष्ट्र है, जिसके लोग अपनी स्वायत्तता के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। इस अभियान के तहत दुनिया भर में भूख हड़ताल, विरोध प्रदर्शन, कैंडललाइट मार्च, जन रैलियां और कूटनीतिक दबाव के माध्यम से उनके संदेश को आगे बढ़ाया जा रहा है।
चीनी ‘जातीय एकता कानून’ पर कड़ा प्रहार
तिब्बती यूथ कांग्रेस ने चीन के तथाकथित ‘जातीय एकता और प्रगति कानून’ को सिरे से खारिज कर दिया है। तिब्बती यूथ कांग्रेस का आरोप है कि यह कानून एकता के लिए नहीं, बल्कि तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान को मिटाने का एक ‘राजनीतिक हथियार’ है। “जातीय एकता” की आड़ में चीन व्यवस्थित रूप से तिब्बती भाषा को दबाने, सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने, इतिहास को बदलने और औपनिवेशिक बोर्डिंग स्कूलों के माध्यम से बच्चों का ब्रेनवॉश करने का प्रयास कर रहा है।
तिब्बती यूथ कांग्रेस ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक के उस बयान की तीखी निंदा की है, जिसमें तिब्बत को ‘अल्पसंख्यक’ कहा गया था। संगठन ने स्पष्ट किया कि तिब्बत कोई अल्पसंख्यक समूह नहीं, बल्कि एक राष्ट्र है जिस पर अवैध कब्जा किया गया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्षता बनाए रखने और चीन के नैरेटिव को बढ़ावा न देने का आग्रह किया है।
तिब्बती यूथ कांग्रेस की 19वीं कार्यकारी समिति ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि शहीद लोबगा रंगज़ेन का बलिदान संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक नई क्रांति की शुरुआत है। उनका स्पष्ट संदेश है ‘तिब्बत एक राष्ट्र था, तिब्बत एक राष्ट्र है और तिब्बत आज़ाद होगा।’
तिब्बती यूथ कांग्रेस की प्रमुख मांगें
1. लोबगा रंगज़ेन ने संयुक्त राष्ट्र के सामने प्राण त्यागे थे, इसलिए UN को तिब्बत की गंभीर स्थिति पर औपचारिक और सार्थक प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
2. उन चीनी नीतियों की जांच हो जिन्होंने तिब्बती लोगों को आत्मदाह जैसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया।
3. अंतरराष्ट्रीय समुदाय तिब्बत की ऐतिहासिक स्वतंत्रता को स्वीकार करे और इसे एक ‘कब्ज़े वाले राष्ट्र’ के रूप में मान्यता दे।
4. ज़बरदस्ती थोपे गए “जातीय एकता कानून” को तुरंत रद्द किया जाए।
5. विश्व के सबसे कम उम्र के राजनीतिक कैदी 11वें पंचेन लामा सहित सभी कलाकारों, पर्यावरणविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए।


