शिक्षाहिमाचल प्रदेश

सुबाथू से उम्लिंग ला तक 3000 किलोमीटर की सम्मान यात्रा

शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि

‘जब तुम घर लौटो, तो उन्हें हमारे बारे में बताना और कहना-तुम्हारे कल के लिए हमने अपना आज दे दिया’
– जॉन मैक्सवेल एडमंड्स

धर्मशाला।

किसी भी राष्ट्र की स्वतंत्रता और सुरक्षा उसके सैनिकों के साहस, समर्पण और सर्वोच्च बलिदान से सुरक्षित होती है। वर्दी पहनने वाले सैनिकों के लिए भाईचारे का बंधन समय, दूरी और यहां तक कि मृत्यु की सीमाओं से भी परे होता है। राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को स्मरण करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक कर्तव्य और भारतीय सेना की उस गौरवशाली परंपरा के प्रति सम्मान है, जो कर्तव्य, साहस और राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि मानती है।

इसी भावना के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए 12 पूर्व सैनिक मोटरसाइकिल राइडर्स, जिनमें हिमाचल प्रदेश का एक राइडर भी शामिल है, अपने शहीद साथियों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक चुनौतीपूर्ण एवं भावपूर्ण मोटरसाइकिल अभियान पर निकले हैं। यह अभियान हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक सैन्य नगर सुबाथू से शुरू होकर 12 सितंबर 2026 को लद्दाख के उम्लिंग ला दर्रे पर संपन्न होगा, जो विश्व का सबसे ऊंचा मोटर योग्य दर्रा है। लगभग 3,000 किलोमीटर की यह यात्रा उन कोर्स-मेट्स और साथी अधिकारियों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा करते हुए कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

इस अभियान का समापन 12 सितंबर को सरागढ़ी दिवस के अवसर पर होना इसे और भी विशेष बनाता है। यह दिन ऐतिहासिक सारागढ़ी युद्ध के वीर योद्धाओं की अदम्य वीरता, निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। सारागढ़ी की वीरगाथा आज भी सैनिकों की पीढ़ियों को प्रेरणा देती है और भारतीय सेना के शाश्वत आदर्श “सेवा परमो धर्मः” तथा ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को प्रतिबिंबित करती है।

राइडर्स अपने साथ एक विशेष रूप से तैयार किया गया बैनर लेकर चल रहे हैं, जिस पर उनके उन वीर साथी अधिकारियों के नाम अंकित हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। सुबाथू से शुरू हुई यह यात्रा हिमालय के दुर्गम पर्वतीय मार्गों, जलधाराओं को पार करते हुए और अत्यधिक ऊंचाई वाले कठिन दर्रों से गुजरते हुए लगभग 3,000 किलोमीटर की दूरी तय कर उम्लिंग ला पहुंचेगी।

यह बैनर पूरी यात्रा के दौरान अत्यंत सम्मान और सैन्य गरिमा के साथ राइडर्स के साथ रहेगा। उम्लिंग ला पहुंचने पर इसे सर्वोच्च सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा, जहां सभी राइडर्स एकत्र होकर अपने वीर शहीद साथियों को भावपूर्ण एवं गरिमापूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह अभियान केवल मोटरसाइकिल यात्रा नहीं है। यह उस अटूट भाई Camaraderie और सैन्य बंधुत्व का प्रतीक है, जो भारतीय सैनिकों की पहचान है। वर्षों बीत जाने के बाद भी उन वीर साथियों की स्मृतियां उनके सहकर्मियों और मित्रों के हृदय में उसी सम्मान और गर्व के साथ जीवित हैं।

उम्लिंग ला की ओर बढ़ते हुए राइडर्स मार्ग में आने वाले विभिन्न युद्ध स्मारकों पर भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। प्रत्येक युद्ध स्मारक उन अनगिनत वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाएगा, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा और सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए।

यात्रा के दौरान सियाचिन युद्ध स्मारक पर भी विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। यह श्रद्धांजलि उन वीर सैनिकों को समर्पित होगी, जिन्होंने विश्व के सबसे कठिन, दुर्गम और प्रतिकूल युद्धक्षेत्रों में से एक सियाचिन में देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। सियाचिन भारतीय सैनिक के अदम्य साहस, असाधारण धैर्य, शौर्य और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है।

हिमाचल प्रदेश के सुबाथू से शुरू होकर लद्दाख के उम्लिंग ला पर संपन्न होने वाली यह यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों से आए पूर्व सैनिक राइडर्स को एक साझा उद्देश्य से जोड़ती है-अपने उन वीर साथियों को स्मरण करना और सम्मान देना, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना आज बलिदान कर देश के भविष्य को सुरक्षित किया।

उनकी मोटरसाइकिलें भले ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय करेंगी, लेकिन वास्तव में यह यात्रा अपने साथ इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण विरासत लेकर चल रही है-अपने शहीद साथियों के नाम, उनकी स्मृतियां, उनका साहस और उनका बलिदान।

यह सम्मान, स्मरण और भाईचारे की यात्रा है-साथियों की ओर से साथियों के लिए और उन वीर सैनिकों की ओर से राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक, जिन्होंने इसकी रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इन राइडर्स के साथ एक सरल लेकिन अत्यंत शक्तिशाली संदेश भी है: ‘जिन्होंने हमारे कल के लिए अपना आज दे दिया, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका बलिदान तिरंगे में, उस राष्ट्र में जिसकी उन्होंने रक्षा की और अपने साथियों के हृदयों में सदैव जीवित रहेगा।’

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!