विधायक बनाम सरकार: सुधीर शर्मा के खिलाफ FIR पर भड़की भाजपा; राज्यपाल से हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की गुहार
धीर शर्मा के समर्थन में उमड़ी जनता, कांग्रेस सरकार पर लगाया 'पॉलिटिकल वेंडेटा' का आरोप
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा हो गई है। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ दर्ज हुई हालिया एफआईआर (FIR) के विरोध में आज पूरा धर्मशाला मंडल सड़कों पर उतर आया। भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता ने एकजुट होकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ की पराकाष्ठा करार दिया है।
भाजपा धर्मशाला मंडल द्वारा राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में सुधीर शर्मा के विरुद्ध दर्ज एफआईआर संख्या 05/2026 (विजिलेंस) और 141/2026 (धर्मशाला थाना) को राजनीति से प्रेरित बताया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जब से सुधीर शर्मा ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा है और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है, तब से उन्हें सरकारी तंत्र के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि एफआईआर और पुलिसिया दबाव के दम पर न तो विपक्ष की आवाज दबेगी और न ही जनता के मुद्दों को दबाया जा सकेगा।
भाजपा ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि क्या अब हिमाचल में सरकार की आलोचना करना अपराध की श्रेणी में आता है? क्या एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता की आवाज उठाने के बदले मुकदमों का सामना करना पड़ेगा? ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि कानून के समक्ष समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी उच्चस्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
इस विवाद के बीच विधायक सुधीर शर्मा ने एक और विस्फोटक मुद्दा उठाया है। उन्होंने राज्यपाल और मुख्य सचिव को दिए अपने प्रतिवेदन में प्रदेश के सेवारत ‘लॉ ऑफिसर्स’ (अतिरिक्त महाधिवक्ता और उप-महाधिवक्ता) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि सरकारी पदों पर आसीन ये अधिकारी राजनीतिक दलों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हो रहे हैं, जो उनकी नियुक्ति की शर्तों और प्रशासनिक नैतिकता का सीधा उल्लंघन है। शर्मा ने मांग की है कि इन अधिकारियों की भूमिका की समयबद्ध जांच की जाए और उनके कार्यालय की तटस्थता सुनिश्चित की जाए।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता का दुरुपयोग कर विरोधियों को कुचलने की परंपरा प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए घातक है। उन्होंने कहा की राजनीतिक लड़ाई राजनीतिक मैदान में लड़ी जानी चाहिए, पुलिस और एफआईआर के पीछे छिपकर नहीं। धर्मशाला की जनता ने साफ संदेश दिया है कि वे अपने विधायक के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी भी अन्यायपूर्ण कार्रवाई का लोकतांत्रिक तरीके से डटकर विरोध करेंगे।
धर्मशाला की सड़कों पर हुए इस शक्ति प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और भी उग्र रूप ले सकती है।



