तबाही के बाद ‘मिशन रिकवरी’: मलबे में दबे सामान की तलाश में जुटे सेना के जवान और ग्रामीण
कांगड़ा में कुदरत की मार के बीच डटे जांबाज: बोह घाटी में सेना और स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा, कल पहुंचेंगी पोकलेन मशीनें
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के अंतर्गत शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की बोह घाटी में बादल फटने से मची तबाही के बाद अब राहत और पुनर्वास का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। शुक्रवार को भारतीय सेना के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मलबे में जमींदोज हो चुके घरों के क्षेत्र में सघन खुदाई अभियान चलाया।

इस चुनौतीपूर्ण अभियान के दौरान मलबे के ढेर से ग्रामीणों को कंबल, बिस्तर और दैनिक उपयोग का अन्य सामान बरामद हुआ है। मलबे से निकला यह सामान स्थानीय निवासी दीनानाथ का बताया जा रहा है। हालांकि, आपदा की मार झेल रहे परिवारों के लिए अब भी अपनी मेहनत की कमाई और कीमती जेवरातों की तलाश प्राथमिकता बनी हुई है, जो फिलहाल मलबे में गहरे दबे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि खुदाई जारी रहने पर उनका अन्य कीमती सामान भी सुरक्षित मिल सकता है।
राहत कार्य में बाधा बन रहे विशाल पत्थर
मौके पर मौजूद राहत कर्मियों और स्थानीय युवाओं के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन में अब बड़े-बड़े पत्थर बड़ी बाधा बन रहे हैं। सेना के कमांडेंट ने जानकारी दी है कि हाथ से की जा रही खुदाई अब मुश्किल होती जा रही है। इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय सेना की दो विशेष पोकलेन मशीनें शाहपुर से रवाना हो चुकी हैं।

कल का दिन बेहद अहम
यदि शनिवार को मौसम साफ रहता है और स्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो इन पोकलेन मशीनों को दुर्गम प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। भारी मशीनों के आने से भारी पत्थरों और मलबे को हटाने में तेजी आएगी, जिससे दबे हुए सामान और संपत्तियों को सुरक्षित निकालने में मदद मिलेगी। फिलहाल, सेना और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता पहुंचाना और उनकी बुनियादी चीजों को मलबे से बाहर निकालना है।


