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मंत्री अनिरुद्ध और गोमा की अनुराग ठाकुर को खुली चुनौती!

20 साल पहले आरडीजी बंद करने की जारी की गई चिट्ठी दिखाएं

शिमला।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा ने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि वह राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के मुद्दे पर प्रदेश की जनता को गुमराह करना बंद करें। मंत्रियों ने कहा कि अनुराग ठाकुर का यह दावा पूरी तरह निराधार है कि केंद्र सरकार ने 20 वर्ष पहले ही RDG बंद करने का निर्णय ले लिया था।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह और यादविंद्र गोमा ने अनुराग ठाकुर को चुनौती देते हुए कहा कि यदि ऐसा है तो वह इस संबंध में केंद्र सरकार की एक भी चिट्ठी सार्वजनिक करें। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद केवल राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। साथ ही उनसे स्पष्ट करने को कहा कि क्या वे हिमाचल प्रदेश को आरडीजी जारी रखने के पक्ष में हैं या नहीं।

सांविधानिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं
मंत्री अनिरुद्ध सिंह और यादविंद्र गोमा ने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का सांविधानिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में आर्थिक कुप्रबंधन हुआ, जिसका खामियाजा प्रदेश को भुगतना पड़ा। मंत्रियों ने कहा हिमाचल प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेलने के लिए पूर्व भाजपा सरकार जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर और अन्य भाजपा नेताओं को इधर-उधर की बयानबाजी करने के बजाय आरडीजी के मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख प्रदेश की जनता के सामने रखना चाहिए। मंत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री कई बार भाजपा नेताओं के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलने की बात कह चुके हैं, लेकिन भाजपा नेता केवल राजनीतिक लाभ लेने में लगे हुए हैं।

अनुराग ठाकुर की सलाह की आवश्यकता नहीं
मंत्री अनिरुद्ध सिंह और यादविंद्र गोमा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश पर कर्ज के मसले पर गंभीर है और इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अनुराग ठाकुर की सलाह की आवश्यकता नहीं है। दोनों ने आरोप लगाया कि अनुराग ठाकुर और प्रदेश भाजपा के नेता इस मुद्दे पर केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने और राजनीति करने में व्यस्त हैं। सर्वदलीय बैठक में भाजपा का हिमाचल विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है।

फिजूलखर्ची के कारण कमजोर हुई आर्थिक स्थिति
प्रदेश की जनता ने देखा कि भाजपा नेताओं ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए बैठक से वॉकआउट किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें हिमाचल के हितों से कोई सरोकार नहीं है। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची के कारण आज प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल के दौरान राज्य को लगभग 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में प्राप्त हुए, यानी कुल 70,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता केंद्र सरकार से मिली।

इन संसाधनों का उपयोग विकास के बजाय ठेकेदारों और चहेतों को लाभ पहुंचाने में किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऐसे भवन बना दिए, जो आज खाली पड़े हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोलन जिले के नालागढ़ में 5,000 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि पूर्व भाजपा सरकार ने अपने उद्योगपति मित्रों को कौड़ियों के भाव आवंटित कर दी।

रजिस्ट्री से एक भी पैसा प्राप्त नहीं हुआ
‘कस्टमाइज पैकेज’ के नाम पर सस्ती जमीन के साथ स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट दी गई, जिससे सरकार को रजिस्ट्री से एक भी पैसा प्राप्त नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त, पांच वर्षों के लिए बिजली शुल्क में भी 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई। साथ ही तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली, मुफ्त पानी और मुफ्त वेयरहाउस की सुविधा भी दी गई। क्या यह आर्थिक कुप्रबंधन नहीं है?

संसाधनों को इस प्रकार क्यों लुटाया
मंत्रियों ने कहा कि वर्तमान सरकार पर निराधार आरोप लगाने वाले भाजपा नेताओं को पहले, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से यह पूछना चाहिए कि प्रदेश के संसाधनों को इस प्रकार क्यों लुटाया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने कड़ा वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और अपने संसाधनों से 26,683 करोड़ रुपये जुटाए हैं। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार ने मात्र 23,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जबकि 26,000 करोड़ रुपये ब्याज और मूलधन के रूप में वापस किए।

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