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पात्र मतदाता की सहज भागीदारी सुनिश्चित करना प्राथमिकता: नंदिता गुप्ता

धर्मशाला में चुनावी पहचान प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मंथन

धर्मशाला।

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशन में धर्मशाला के एक निजी होटल में मतपत्र में पहचान में आसानी विषय पर एक दिवसीय थीमैटिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं की पहचान को सरल, पारदर्शी और समावेशी बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, हिमाचल प्रदेश नंदिता गुप्ता ने किया। नंदिता गुप्ता ने ‘ईज ऑफ आइडेंटिफिकेशन एट द बैलेट’ विषय पर तैयार की गई थीमैटिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य विषयक सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के सीएनटी प्रभाग एवं थीमैटिक विशेषज्ञ कपिल शर्मा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अल्बानिया के केंद्रीय निर्वाचन आयोग की इलेक्ट्रॉनिक मतदाता पंजीकरण एवं पहचान प्रमुख गेरियन वेजुली तथा बांग्लादेश निर्वाचन आयोग के मुमताज-अल-शिबली ने अपने-अपने देशों के अनुभव एवं नवाचार प्रतिभागियों के साथ साझा किए।

नंदिता गुप्ता ने कहा लोकतंत्र की सफलता केवल मतदान प्रतिशत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि प्रत्येक पात्र मतदाता बिना किसी कठिनाई के अपनी पहचान स्थापित कर मतदान प्रक्रिया में सहभागी बन सके। यह कार्यशाला हमें मतदाता पहचान से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक, तकनीकी और सामाजिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श का अवसर प्रदान कर रही है। आज तकनीक और नवाचार चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, समावेशी और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज का कोई भी वर्ग चाहे वह महिला, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, प्रवासी अथवा जनजातीय समुदाय से संबंधित हो, मतदान के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न रहे।

नंदिता गुप्ता ने कहा कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव और अनुभव भविष्य में मतदाता पहचान प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे। कार्यशाला को विभिन्न विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया, जिनमें कानूनी प्रावधान एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे, मतदान से पूर्व मतदाता जागरूकता, वंचित एवं हाशिए पर रह रहे समुदायों की भागीदारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नई तकनीकों की भूमिका, मतदान के दौरान मतदाता पहचान संबंधी प्रशासनिक चुनौतियाँ तथा अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

पहले सत्र में पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान, प्रबंध निदेशक एचपीएमसी एवं पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी डी.सी. राणा तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी ऋषधांशु ने कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। मतदाता जागरूकता विषयक सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रो. सन्नी अटवाल, सहायक प्रोफेसर अंकिता धवन, राज्य स्वीप आइकन शालिनी शर्मा तथा जसप्रीत ने मतदान से पूर्व जागरूकता अभियानों की भूमिका पर चर्चा की।

लोकतंत्र को और मजबूत करना ही उद्देश्य
हिमाचल प्रदेश की मुख्य चुनाव अधिकारी नंदिता गुप्ता ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बताया कि इंटरनेशनल इंस्टीटयूट आफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट, जोकि अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी इस वर्ष की चेयरशिप भारत ने संभाली है। विश्व में जितने भी लोकतांत्रिक देश हैं, उनके मध्य समन्वस स्थापित हो और लोकतंत्र को और मजबूत करने के लिए वार्तालाप करना ही इस वर्कशाप का उद्देश्य है। भारत के विभिन्न राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को एक-एक टॉपिक दिया गया है, जिसके आधार पर उन्हें वर्कशाप का आयोजन करना है। बांग्लादेश और अल्बानिया चुनाव आयोग के प्रतिनिधि भी वर्कशाप में जुड़े थे, जिन्होंने कई सुझाव दिए हैं। अल्बानिया अपने वोटर्स की वोटिंग से पहले डिजिटल आईडेंटिफिकेशन करता है, वहीं बांग्लादेश अपने ओवरसीज वोटर्स के लिए पोस्टल बैलेट की व्यवस्था करता है।

हिमाचल प्रदेश मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय एक रिपोर्ट बनाने की तैयारी में है, इसी कड़ी में यह वर्कशाप आयोजित की गई। विश्व के 100 विभिन्न देशों के इलेक्ट्रोल सिस्टम पर एक रिपोर्ट तैयार करके इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया को भेजी जाएगी, जिसमें इज आफ आइडेंटिफिकेशन एट द बैलेट पर फोकस रहेगा।

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