राजनीतिहिमाचल प्रदेश

‘155 करोड़ के दावों पर केवल 49 करोड़ ही क्यों मिले’

पत्रकार वार्ता में भवानी सिंह पठानिया और आशीष बुटेल ने भाजपा पर दागे सवाल

धर्मशाला।

भवानी सिंह पठानिया और विधायक आशीष बुटेल ने आज रविवार को धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री द्वारा हाल ही में हिमाचल प्रदेश को लेकर किए गए दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि घोषित सहायता और वास्तविक रूप से प्राप्त वित्तीय सहयोग के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है। भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके जे.पी. नड्डा तथा पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में हिमाचल प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर कई टिप्पणियां की गईं। इन बयानों पर कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट करना आवश्यक है।

भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत हिमाचल प्रदेश जैसे विशेष श्रेणी के राज्यों में 90:10 के अनुपात में वित्तीय साझेदारी की जाती है, जिसमें 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है। लेकिन वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य दावों पर लगभग 155 करोड़ रुपये के व्यय के मुकाबले केंद्र से मात्र 49 करोड़ रुपये की राशि ही प्राप्त हुई है। यदि केंद्र वास्तव में अपनी 90 प्रतिशत जिम्मेदारी निभा रहा होता तो प्रदेश सरकार को अपने सीमित संसाधनों से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

दावों और वास्तविक सहायता के बीच गंभीर अंतर
भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि बताया कि वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक मरीजों के उपचार पर लगभग 599 करोड़ रुपये के दावे बने, जबकि इस अवधि में केंद्र का कुल योगदान लगभग 310 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर राज्य सरकार को अतिरिक्त रूप से लगभग 247 करोड़ रुपये का वित्तीय भार उठाना पड़ा। यह स्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार के दावों और वास्तविक सहायता के बीच गंभीर अंतर मौजूद है।

एक गंभीर विश्वासघात
सबसे पहला प्रश्न यह है कि यदि जयराम ठाकुर को वर्ष 2019-20 में ही यह जानकारी थी कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) भविष्य में बंद होने वाला है, तो उन्होंने प्रदेश की जनता, कर्मचारियों और प्रशासन को इसके लिए क्यों तैयार नहीं किया? यदि यह जानकारी वास्तव में उनके पास थी, तो आने वाली सरकार को आगाह करना और वित्तीय प्रबंधन को उसी अनुरूप व्यवस्थित करना उनकी जिम्मेदारी थी। यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो यह हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ एक गंभीर विश्वासघात माना जाएगा।

कांग्रेस सरकार को पहले से सब पता था, पूरी तरह निराधार
दूसरी ओर, यदि आरडीजी बंद होने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी, तो फिर यह दावा करना कि कांग्रेस सरकार को पहले से सब पता था, पूरी तरह निराधार है। 16वें वित्त आयोग से संबंधित बैठकों में मुख्यमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ लगातार यह मांग करते रहे कि 15वें वित्त आयोग की तरह राजस्व घाटा अनुदान को जारी रखा जाए। किसी भी स्तर पर यह संकेत नहीं दिया गया कि इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।

आर्थिक स्थिति को मजबूत क्यों नहीं किया
भाजपा सरकार के कार्यकाल (2017-2022) के दौरान प्रदेश को केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान और जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता प्राप्त हुई। इसके बावजूद भाजपा सरकार प्रदेश को लगभग 75 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ के साथ छोड़ गई। यदि इतने बड़े वित्तीय संसाधन उपलब्ध थे, तो फिर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत क्यों नहीं किया गया? कर्मचारियों के लंबित एरियर और अन्य देनदारियां क्यों नहीं चुकाई गईं?

आज भाजपा कांग्रेस सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगा रही है, जबकि यह पूछना भी जरूरी है कि उस दौरान प्राप्त अतिरिक्त संसाधनों से कौन-से बड़े अस्पताल, विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान या अन्य स्थायी परिसंपत्तियां बनाई गईं, जिनका लाभ प्रदेश की जनता को मिल रहा हो।

पूरी तरह तथ्यहीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रभावित हिमाचल प्रदेश को 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक यह राशि प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई। केंद्र सरकार की टीमों ने वर्ष 2023 और 2024 की आपदाओं के बाद प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है। सभी परियोजनाओं और क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है। ऐसे में यह कहना कि हिमाचल प्रदेश ने सहायता के उपयोग का विवरण नहीं दिया, पूरी तरह तथ्यहीन है।

भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा जाईका परियोजना को लेकर भी भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि यह एक बाह्य सहायता प्राप्त परियोजना है और इसकी स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक प्रदेश को अपेक्षित धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी, आधुनिक उपकरणों की खरीद, सीटी स्कैन मशीनों की स्थापना तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जो खर्च हुआ है, वह हिमाचल प्रदेश सरकार के अपने संसाधनों से किया गया है।

प्रदेश सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। विभिन्न अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्तियां हुई हैं, आधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किए गए हैं तथा मेडिकल कॉलेजों में विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों की शुरुआत भविष्य में कैंसर और जटिल बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार वित्तीय अनुशासन स्थापित करने, अनावश्यक खर्चों में कटौती करने और सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बिजली बोर्ड, परिवहन निगम और अन्य सरकारी संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया जारी है, जिसके सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो चुके हैं। वास्तविकता यह है कि भाजपा की आलोचनाओं का लक्ष्य केवल प्रदेश सरकार नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी प्रतीत होती है। हिमाचल प्रदेश की जनता तथ्यों को समझती है और जानती है कि वर्तमान सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

प्रदेश सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, वित्तीय चुनौतियों का समाधान करते हुए जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना।

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