हिमाचल निकाय चुनाव: जीत के जश्न के बीच अपनों के गढ़ में कांग्रेस को झटका
डिप्टी सीएम के गृह जिले सहित 16 निकायों में हार ने खड़े किए सवाल
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनावों को ‘सत्ता का सेमीफाइनल’ माना जा रहा था, जिसमें कांग्रेस ने 47 में से 31 नगर निकायों पर जीत का परचम लहराकर अपना वर्चस्व तो सिद्ध कर दिया है, लेकिन दिग्गजों के गढ़ में मिली हार ने पार्टी के भीतर आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ जहां कांग्रेस 31 निकायों पर जीत का दावा कर रही है, वहीं 16 निकायों में मिली शिकस्त ने संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डिप्टी सीएम के गृह जिले में प्रदर्शन निराशाजनक
हैरानी की बात यह है कि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिले ऊना में कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ऊना के साथ-साथ बिलासपुर में भी पार्टी को संतोषजनक नतीजे नहीं मिले। इन क्षेत्रों में मिली हार के पीछे संगठन की कमजोरी थी या फिर प्रत्याशियों के चयन को लेकर जनता की नाराजगी, इसे लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
शिमला और सोलन में भी मिली-जुली प्रतिक्रिया
राजधानी शिमला जिला की बात करें तो जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में विरोधाभासी परिणाम सामने आए हैं; जहाँ जुब्बल नगर परिषद में कांग्रेस को जीत मिली, वहीं कोटखाई में हार का सामना करना पड़ा। सोलन में भी चुनावी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में बहुत उत्साहजनक नहीं रहे। इसके अतिरिक्त, रामपुर में भी कांग्रेस को शिकस्त झेलनी पड़ी है, जहाँ वर्तमान में कांग्रेस का ही विधायक है।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ करेगी हार की समीक्षा
हार के कारणों पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा ने कहा कि पार्टी जल्द ही एक ‘फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ का गठन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल एक-दो सीटों के परिणामों से मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन करना उचित नहीं होगा। जिंटा ने कहा, “हमने इस सेमीफाइनल में एकतरफा जीत हासिल की है, लेकिन जहां भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया जाएगा। ऊना और रामपुर जैसे क्षेत्रों में प्रदर्शन क्यों कमजोर रहा, कमेटी इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।”
अगली अग्निपरीक्षा: 4 नगर निगमों का रण
प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद विनय कुमार के नेतृत्व में यह पहला चुनाव था, जिसमें पार्टी ने समग्र रूप से शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि, पार्टी के लिए असली चुनौती आगामी 4 नगर निगमों के चुनाव होंगे, जो सीधे तौर पर पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़े जाते हैं। कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल जीत के दावों में जरूर है, लेकिन ऊना और बिलासपुर जैसे रणनीतिक जिलों में मिली हार आगामी चुनावों के लिए एक चेतावनी की तरह है।


