सेब उत्पादकों को थमाए जा रहे नोटिस पर भड़के चेतन बरागटा, सुक्खू सरकार को घेरा
100 करोड़ के बकाये और 'सत्यापन' के जाल में फंसा बागवान, भाजपा ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
शिमला।
जुब्बल-कोटखाई से भाजपा नेता चेतन बरागटा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर बागवानी अर्थव्यवस्था को चौपट करने और बागवानों को प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जो बागवान प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ हैं, आज वही सरकार की अदूरदर्शी नीतियों और ‘नोटिस राज’ के कारण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
बरागटा ने वर्ष 2025 में एमआईएस के तहत 100 से अधिक बोरियां बेचने वाले बागवानों को भेजे जा रहे सत्यापन नोटिसों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सवाल किया कि जब HPMC ने सेब खरीदा, तब यह सत्यापन क्यों नहीं किया गया? अब जब भुगतान की बारी आई है, तो बागवानों से आधार, जमाबंदी, ततीमा और बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज मांगकर उन्हें अपराधियों की तरह कतारों में खड़ा किया जा रहा है। हिमाचल के इतिहास में ऐसी दमनकारी व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी गई।
100 करोड़ का बकाया और चयनात्मक कार्रवाई का आरोप
चेतन बरागटा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार पर बागवानों की 100 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी लंबित है। उन्होंने सरकार पर ‘पिक एंड चूज’ (चयनात्मक कार्रवाई) का आरोप लगाते हुए कहा कि आम बागवानों को तो नोटिस दिए जा रहे हैं, लेकिन सत्ता के करीब बैठे प्रभावशाली लोगों को इससे बाहर रखा गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस पूरे मामले पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करे और विधानसभा क्षेत्रवार डेटा सार्वजनिक करे कि आखिर किन आधारों पर नोटिस बांटे जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार का अड्डा बना HPMC, पूरी चेन की हो जांच
भाजपा नेता बरागटा ने कहा कि यदि सरकार को एमआईएस खरीद में गड़बड़ी का संदेह है, तो जांच केवल बागवानों तक सीमित क्यों है? उन्होंने आरोप लगाया कि HPMC भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। उन्होंने मांग की कि कलेक्शन सेंटरों पर तैनात स्टाफ, परिवहन व्यवस्था और पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, पिछले सीजन में नष्ट किए गए सेब के रिकॉर्ड को भी सार्वजनिक करने की मांग की।
व्यावहारिक समस्याओं से अनभिज्ञ सरकार
बरागटा ने सरकार की ’25 प्रतिशत खरीद’ की शर्त और संयुक्त भूमि रिकॉर्ड की जटिलताओं पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मौसम की मार के कारण कई बागवानों की 80 प्रतिशत तक फसल सी-ग्रेड में चली गई है, ऐसे में 25 प्रतिशत की सीमा किस वैज्ञानिक आधार पर तय की गई है? उन्होंने कहा कि नौकरशाही और सरकार के बीच संवादहीनता के कारण जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
‘हक दो, वरना सड़कों पर उतरेगी भाजपा’
बागवानों की विभिन्न समस्याओं जैसे एंटी-हेलनेट सब्सिडी की बहाली, समय पर खाद-स्प्रे की उपलब्धता और कलेक्शन सेंटरों को सुचारू रूप से चलाने को लेकर बरागटा ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि यह बागवानों का हक है, कोई खैरात नहीं। यदि लंबित भुगतान तुरंत जारी नहीं किया गया और बागवानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो भाजपा पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ेगी।



