धर्मशाला में आसमानी आफत: कांगड़ा संग्रहालय की ऐतिहासिक धरोहर पर मंडराया संकट, फिर दहकी पहाड़ी
लैंडस्लाइड से हड़कंप, डीसी ने लोक निर्माण विभाग को दिए तत्काल एक्शन के निर्देश
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में जारी मूसलाधार बारिश अब ऐतिहासिक विरासतों के लिए काल बनती जा रही है। शहर के प्रतिष्ठित ‘म्यूजियम ऑफ कांगड़ा’ (कांगड़ा संग्रहालय) के पीछे एक बार फिर भीषण भूस्खलन होने से हड़कंप मच गया है। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और एक विशालकाय पेड़ नीचे गिरने से संग्रहालय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन करोड़ों रुपये की बेशकीमती ऐतिहासिक धरोहर अब सीधे खतरे की जद में है।
घटना सुबह करीब 8:15 से 8:35 के बीच की है। धर्मशाला बस अड्डा इंचार्ज विनोद चंदेल के अनुसार, सुबह पहाड़ी से पत्थर गिरने शुरू हुए थे, जिसे देखते हुए सावधानी बरतते हुए बसों और अन्य वाहनों को समय रहते वहां से हटा दिया गया। कुछ ही देर बाद एक विशाल पेड़ मलबे के साथ नीचे आ गिरा। होमगार्ड जवान कुलवंत सिंह ने बताया कि सुबह 8:35 बजे हुए इस लैंडस्लाइड ने पिछले साल के जख्मों को फिर हरा कर दिया है।
संग्रहालय की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति रोष है। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष हुए भूस्खलन के बाद सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ था, लेकिन वह अब तक अधूरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा दीवार को नीचे से ठोस मजबूती के साथ बनाया जाता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
संग्रहालय की क्यूरेटर डॉ. रितु मनकोटिया ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय में करोड़ों रुपये की ऐतिहासिक पांडुलिपियां, कलाकृतियां और सांस्कृतिक संपदा मौजूद है। बस अड्डे की ओर से शुरू हुआ यह नया लैंडस्लाइड सीधे मुख्य भवन को क्षति पहुंचा सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी लोक निर्माण विभाग को रेस्टोरेशन के निर्देश दिए गए थे। डीसी ने कहा की जहां पहले लैंडस्लाइड हुआ था, अब उसके आगे के हिस्से में धंसाव हुआ है। PWD की टीम को तत्काल मौके पर जाकर स्थिति का आकलन करने और सुरक्षा उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार हो रही बारिश ने राहत कार्यों में बाधा डाली है, लेकिन प्रशासन के लिए अब इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि लोक निर्माण विभाग कितनी तत्परता से इस ‘ब्लैक स्पॉट’ को सुरक्षित कर पाता है।


