केंद्र से आई एक-एक पाई का हिसाब दे कांग्रेस सरकार: त्रिलोक कपूर
कहा, यह जनता के पैसे से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक
धर्मशाला।
पीडीएनए (पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेस्मेंट) फंड के उपयोग को लेकर हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। त्रिलोक कपूर ने कहा कि हिमाचल में आपदा पुनर्निर्माण के नाम पर सामने आ रही अनियमितताओं की शिकायतें अत्यंत गंभीर हैं। कुछ स्थानों पर जहां भूस्खलन हुआ ही नहीं, वहां कागजों में स्लिप दिखाकर टेंडर बनाए गए और बिना पर्याप्त काम के बिलों का भुगतान करने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि आपदा के समय प्रधानमंत्री ने हिमाचल के लिए जो घोषणा की थी और उसके बाद पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेस्मेंट के तहत जो पैसा आया, उसके वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तहेदिल से आभार व्यक्त करते हैं। यह पैसा जिस उद्देश्य के लिए आया है, उसका उपयोग सही जगह पर होना चाहिए, ताकि जनता को राहत मिल सके। यह जनता के पैसे से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता कपूर ने कहा कि केंद्र सरकार ने 18 जून, 2025 को वर्ष 2023 की आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश के लिए 2,006.40 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत की, जिसमें केंद्रीय हिस्सा 1,504.80 करोड़ था। पहली केंद्रीय किस्त के रूप में 451.44 करोड़ जारी किए गए। उन्होंने कहा कि 13 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश के अनुसार दूसरी किस्त में विभिन्न विभागों के लिए 753.29 करोड़ स्वीकृत हुए, जिसमें 564.97 करोड़ केंद्रीय और 188.32 करोड़ राज्य हिस्सा दर्शाया गया है। अकेले लोक निर्माण विभाग को 487.80 करोड़, जल शक्ति विभाग को 176.48 करोड़, कृषि विभाग को 29.13 करोड़ और बिजली बोर्ड को ?18.22 करोड़ स्वीकृत किए गए।
त्रिलोक कपूर ने सवाल किया कि जब सडक़ों और पुलों के पुनर्निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई, तो आज भी अनेक सड़कें बदहाल क्यों हैं? जनता गड्ढों, टूटी सडक़ों और बाधित यातायात से परेशान क्यों है? कपूर ने कहा कि अगस्त 2026 में 259 सड़कें अवरुद्ध होने की खबरें सामने आई थीं। सितंबर में ठियोग और किन्नौर के पूह क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर भी यातायात बाधित हुआ।
प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता कपूर ने कहा कि सरकारी आदेश में स्पष्ट निर्देश है कि पीडीएनए का पैसा केवल 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त और स्वीकृत परिसंपत्तियों पर खर्च होगा। नियमों से बाहर खर्च की व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित स्वीकृति अधिकारियों की होगी। ऐसे में सरकार बताए कि क्या प्रत्येक टेंडर से पहले वास्तविक नुकसान का सत्यापन किया गया? उन्होंने कहा कि आदेश में मार्च 2026 तक धनराशि उपयोग करने और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश थे। मुख्यमंत्री बताएं कि कितने कार्य पूरे हुए, कितने बिल पास हुए और कितने कार्यों की जांच हुई?
प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता कपूर ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की शिकायतों को सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने मांग की कि सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों की स्वीकृत राशि, टेंडर, ठेकेदारों और भुगतान का विवरण सार्वजनिक किया जाए। आपदा पीडि़तों के पुनर्निर्माण का पैसा किसी के राजनीतिक संरक्षण या निजी लाभ का साधन नहीं बन सकता। जहां अनियमितता के प्रमाण मिलें, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई हो।
त्रिलोक कपूर ने सभी संदिग्ध कार्यों का विशेष ऑडिट, भौतिक सत्यापन और पीडीएनए फंड पर विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।



