लोकतंत्र के हत्यारों को यह नारा शोभा नहीं देता’: BJP की रैली पर भड़के पूर्व मेयर देवेंद्र जग्गी
तीखा प्रहार: लोकतंत्र बचाने का ढोंग करने वालों को पहले अपने आचरण पर करना चाहिए आत्ममंथन
धर्मशाला।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से शुक्रवार को धर्मशाला में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली पर धर्मशाला के पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाली भाजपा को पहले अपने राजनीतिक आचरण और अतीत में किए गए कार्यों का जवाब देना चाहिए। देवेंद्र जग्गी ने सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित रूप से बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई जा रही थीं, तब लोकतंत्र की चिंता करने वाले भाजपा नेता कहां थे? उस समय छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में उनकी आवाज क्यों नहीं उठी?
देवेंद्र जग्गी ने कहा कि लोकतंत्र केवल रैलियां निकालने, नारे लगाने और मंचों से भाषण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ जनता के अधिकारों, उसकी आवाज और जनादेश का सम्मान करना है। जब छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल उठता है, तब भी समान रूप से आवाज उठनी चाहिए। लोकतंत्र के सिद्धांतों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं अपनाया जा सकता।
देवेंद्र जग्गी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोप उठाता है, तब भाजपा इन सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन करने के बजाय चुनाव आयोग के बचाव में खड़ी दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित वोट चोरी का सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलता है, इसलिए वह इन मुद्दों पर उठ रहे सवालों से बचने का प्रयास करती है।
पूर्व महापौर जग्गी ने हाल ही में हुए एमएलसी चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनावों में मतपत्रों के माध्यम से हुए मतदान के नतीजों ने भाजपा को कई जगह झटका दिया है। प्रधानमंत्री के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय नागपुर में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि ये परिणाम इस बात का संकेत हैं कि जनता अब जागरूक हो रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी आवाज बुलंद कर रही है। जनता सब समझती है और अब काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ने वाली।
देवेंद्र जग्गी ने कहा कि देश की जनता जागरूक है और वह भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को भली-भांति समझती है। भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा जनता के सामने आ चुका है। केवल लोकतंत्र बचाने का नारा देने से लोकतंत्र के प्रति जवाबदेही साबित नहीं होती। इसके लिए निष्पक्ष संस्थाओं का सम्मान, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
देवेंद्र जग्गी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने के बजाय उसका सम्मान किया जाना चाहिए। चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का जवाब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि तथ्यों, तर्कों और पारदर्शी जांच के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
जग्गी ने कहा कि जो लोग लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के मताधिकार से जुड़े सवालों पर मौन रहते हैं, उन्हें आज लोकतंत्र बचाने का उपदेश देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र के हत्यारों को ‘लोकतंत्र बचाओ’ का नारा शोभा नहीं देता।



