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युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ की हड्डी, देश का भविष्य युवाओं के कंधों पर: विपिन सिंह परमार

पालमपुर।

भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ की हड्डी होते हैं। देश का भविष्य युवाओं के कंधों पर टिका है और आज युवा जिस प्रकार के विचारों, संस्कारों, अनुशासन एवं संकल्पों के साथ अपने जीवन की नींव तैयार करेंगे, उसी आधार पर आने वाले समय में राष्ट्र की दिशा और दशा निर्धारित होगी। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के अंतर्गत सुलह विधानसभा क्षेत्र के बल्ला परौर स्थित सनराइज पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए विपिन सिंह परमार ने उनके विचारों को जाना तथा लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, संस्कार और युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए परमार ने कहा कि युवा केवल देश की जनसंख्या का महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे देश की सबसे बड़ी ऊर्जा, शक्ति और संभावनाओं के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, “आप देश की रीढ़ की हड्डी हैं। आज आप अपने जीवन की जिस मजबूत नींव का निर्माण करेंगे, जिस दिन वह नींव सशक्त हो जाएगी, उस दिन आप अपने हर सपने को साकार करने की क्षमता रखेंगे। अपने विचारों को मजबूत बनाइए, लक्ष्य निर्धारित कीजिए और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर परिश्रम कीजिए।”

उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के प्रति सचेत करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक निश्चित रूप से ज्ञान और जानकारी प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका अनावश्यक एवं अत्यधिक इस्तेमाल विद्यार्थियों के अध्ययन, एकाग्रता और दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों को मोबाइल फोन का उपयोग न्यूनतम और आवश्यकता के अनुरूप ही करना चाहिए। जब मोबाइल का इस्तेमाल जरूरी हो, तो उसके लिए एक निश्चित समय निर्धारित करें और उसी समय-सीमा के भीतर उसका उपयोग करें। अपना बहुमूल्य समय मोबाइल स्क्रीन पर व्यर्थ करने के बजाय पढ़ाई, खेलकूद, पुस्तकों के अध्ययन, रचनात्मक गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास में लगाएं।

परमार ने विद्यालय के प्रधानाचार्यों एवं अध्यापकों से भी आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद स्थापित करें और उन्हें मोबाइल फोन तथा डिजिटल तकनीक के सही उपयोग के बारे में जागरूक करें। विद्यार्थियों को समझाया जाए कि मोबाइल की उपयोगिता क्या है, इसका इस्तेमाल कब आवश्यक है और कितने समय तक इसका उपयोग उचित है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करवाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, विचारों और भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्यापक अपने अनुभव, संवाद और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच अंतर समझा सकते हैं। इसलिए विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और डिजिटल जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम भारत माता के सपूत हैं और प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह अपनी मातृभूमि की सेवा करे, उसकी सुरक्षा के प्रति सजग रहे और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने में अपना योगदान दे। राष्ट्रप्रेम केवल नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमारे आचरण, कर्तव्यों, ईमानदारी और समाज के प्रति जिम्मेदारियों में भी दिखाई देना चाहिए। विद्यार्थियों को अभी से अपने भीतर देशभक्ति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करनी चाहिए।

परमार ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूक नागरिकों, स्वतंत्र विचारों, संवाद की परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व में निहित है। युवाओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विवेकशील, जिम्मेदार, संस्कारवान और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनना भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रश्न पूछने, अपने विचार रखने और समाज के महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक चर्चा करने की आदत विकसित करें। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। आज के विद्यार्थी ही कल के नेतृत्वकर्ता, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्यमी और राष्ट्र के भाग्य विधाता बनेंगे। इसलिए उनके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन, नैतिकता और परिश्रम की भावना का विकास समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए। विपिन सिंह परमार ने उनकी जिज्ञासाओं को सुना और उन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण मजबूत चरित्र, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासित युवा शक्ति और जागरूक नागरिकों से होता है। यदि आज की युवा पीढ़ी अपने समय का सदुपयोग करते हुए शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देगी, तो भारत को विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का संकल्प निश्चित रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

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