राजनीतिहिमाचल प्रदेश

छह माह के लिए डेफर करने का फैसला सरकार की नाकामी: विश्व चक्षु

कहा, सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ डाल रही

धर्मशाला।

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन को छह माह के लिए डेफर करने का फैसला सरकार की नाकामी को उजागर करता है।

एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि राज्य सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। चुनावों के समय बड़े-बड़े वादे करने वाली सरकार आज अपने ही कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में असमर्थ दिखाई दे रही है, जो कि बेहद चिंताजनक है। विश्व चक्षु ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी स्थिति उत्पन्न हो गई कि सरकार को वेतन भुगतान टालने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक कमजोरी का परिणाम है।

एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि इस निर्णय से हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के परिवार प्रभावित होंगे, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई लगातार बढ़ रही है। वेतन डिफर से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। कई अधिकारियों व कर्मचारियों को चिंता सता रही है कि डेफर किए वेतन को सरकार एक साथ वापिस नहीं करेगी, जबकि पूर्व की भांति लंबित वित्तीय लाभों व डीए को भी रोक लेगी। भाजपा नेता ने सरकार से मांग की कि वह तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार करे और कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। साथ ही राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति को भी सार्वजनिक किया जाए।

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