अधूरी सड़क के बीच टोल वसूली को लेकर आयोग में शिकायत
अधिवक्ता सौरभ कौंडल ने कहा, देहरा, ऊना, चंडीगढ़ जाने वाले वाहन चालकों से टोल वसूली क्यों?
धर्मशाला।
मटौर से शिमला जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर घट्टा में स्थापित टोल प्लाजा की लोकेशन और वहां की जा रही टोल टैक्स वसूली को लेकर अधिवक्ता सौरभ कौंडल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता सौरभ कौंडल ने अधिवक्ता अजीताभ चौधरी की ओर से उपभोक्ता आयोग धर्मशाला में शिकायत दायर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि घट्टा टोल प्लाजा की लोकेशन निर्धारित करने के पीछे क्या आधार है, यह स्पष्ट नहीं है।
सौरभ कौंडल का कहना है कि टोल प्लाजा की मौजूदा लोकेशन के कारण देहरा, ऊना और चंडीगढ़ की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी टोल टैक्स देना पड़ रहा है, जबकि वे संबंधित सड़क के केवल सीमित हिस्से का ही उपयोग करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं इस स्थान पर टोल प्लाजा स्थापित करने से आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ तो नहीं डाला जा रहा है।
सौरभ कौंडल का कहना है कि 2 मई 2025 की राजपत्र अधिसूचना के तहत घट्टा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स निर्धारण के संबंध में कांगड़ा बाईपास, रिउंड पुल टनल तथा घट्टा टोल प्लाजा तक शेष सड़क से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखा जाना था। ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि जो वाहन चालक कांगड़ा से समेला होते हुए टनल पार कर सीधे फोरलेन सड़क से जुड़कर देहरा, ऊना या चंडीगढ़ की ओर जाते हैं, उनसे घट्टा टोल प्लाजा पर किस आधार पर टोल टैक्स वसूला जा रहा है?
अधिवक्ता कौंडल ने कहा कि मटौर से शिमला जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर घट्टा में टोल प्लाजा की लोकेशन निर्धारित करने के औचित्य की जांच होनी चाहिए। यदि इस टोल प्लाजा की लोकेशन के कारण उन वाहन चालकों से भी शुल्क लिया जा रहा है, जो देहरा, ऊना और चंडीगढ़ की ओर जाते समय सड़क के केवल लगभग 8 किलोमीटर हिस्से का उपयोग करते हैं, तो यह गंभीर सार्वजनिक हित का विषय है। उन्होंने मांग की कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस संबंध में स्पष्ट करे कि टोल प्लाजा की लोकेशन किस स्वीकृत योजना के आधार पर तय की गई और संबंधित मार्गों पर यात्रा करने वाले वाहनों से शुल्क वसूलने का कानूनी आधार क्या है।
शिकायत के अनुसार 8 अक्टूबर को अधिवक्ता अजीताभ चौधरी देहरा न्यायिक न्यायालय परिसर गए थे। इस दौरान उनसे देहरा जाते समय 65 रुपये टोल टैक्स लिया गया तथा उसी दिन वापस लौटने पर 35 रुपये वसूले गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने डागियाल टनल से रणिताल तक लगभग 8 किलोमीटर सड़क का ही उपयोग किया था। इसके बावजूद उनसे कुल 100 रुपये टोल टैक्स वसूला गया। शिकायत में इस वसूली के औचित्य और वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा घट्टा टोल प्लाजा से रशुह चौक तक सड़क की एक ओर की लेन बंद होने और केवल एक लेन से यातायात संचालित होने का मुद्दा भी शिकायत में उठाया गया है। ऐसे में सवाल है कि जब सड़क का संबंधित हिस्सा पूरी तरह सुचारु नहीं है, तो वाहन चालकों से टोल टैक्स किस आधार पर वसूला जा रहा है? क्या संबंधित सड़क की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और स्वीकृत परियोजना की शर्तों को ध्यान में रखकर टोल वसूली की जा रही है? इन सभी बिंदुओं पर NHAI से जवाब मांगा गया है।
NHAI से निम्नलिखित दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करवाने की मांग
मटौर से शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग का स्वीकृत अलाइनमेंट प्लान।
संबंधित सड़क परियोजना की स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट।
घट्टा टोल प्लाजा की लोकेशन निर्धारित करने के दर्ज कारण और स्वीकृत दस्तावेज।
वह स्वीकृत परियोजना रिपोर्ट, जिसमें स्पष्ट किया गया हो कि देहरा, ऊना और चंडीगढ़ की ओर जाने वाले वाहनों को घट्टा टोल प्लाजा से होकर गुजरना क्यों आवश्यक है अथवा उनसे टोल वसूली का आधार क्या है।
अधूरी सड़क और एक लेन बंद होने की स्थिति में टोल वसूली से संबंधित नियमों तथा लागू प्रावधानों की जानकारी।
इस मामले में उपभोक्ता आयोग धर्मशाला ने शिकायत स्वीकार कर NHAI मुख्यालय दिल्ली, NHAI के परियोजना निदेशक शिमला, घट्टा टोल प्लाजा के प्रभारी, उपायुक्त कांगड़ा तथा सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी (CALA), कांगड़ा को 30 अक्टूबर को नोटिस जारी किए हैं।
अधिवक्ता कौंडल ने कहा कि इस शिकायत का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करवाना है कि आखिर देहरा, ऊना और चंडीगढ़ की ओर जाने वाले वाहन चालकों को घट्टा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स देने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि वे सड़क के केवल सीमित हिस्से का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि टोल प्लाजा की लोकेशन, सड़क के अलाइनमेंट और टोल वसूली के कानूनी आधार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि टोल प्लाजा की स्थापना या वसूली में निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम जनता से टोल टैक्स वसूलने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि वसूली निर्धारित नियमों और स्वीकृत परियोजना के अनुरूप हो। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनसे किस आधार पर शुल्क लिया जा रहा है और संबंधित टोल प्लाजा की लोकेशन तय करने के पीछे क्या कारण हैं। इस उपभोक्ता शिकायत को तैयार करने में अधिवक्ता सौरभ कौंडल, मुनीश कुमार, सूरज राणा तथा रंजना चौधरी की भूमिका रही।



