सर्वेश के 3.5 करोड़ के ड्रोन ग्रांट दावे को सेना के iDEX सेंटर ने बताया फर्जी, हॉस्टल हादसे की जांच शुरू
सेना के इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस सेंटर ने एक्स पर किया बड़ा खुलासा
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले स्थित राजकीय पॉलीटेक्नीक कॉलेज बड़ू के छात्र सर्वेश शर्मा द्वारा सेना के लिए ड्रोन बनाने के एवज में 3.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ग्रांट मिलने का दावा पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है। भारतीय सेना के ‘इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस’ सेंटर ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर इस खबर को साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि सर्वेश शर्मा के प्रोजेक्ट को ऐसी कोई ग्रांट नहीं मिली है।
इस खुलासे के बाद अब सर्वेश शर्मा के घायल होने और पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल हमीरपुर पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या छात्र किसी शातिर साइबर ठगी का शिकार हुआ था।
क्या लिखा गया है ‘IDEX DIO’ के एक्स हैंडल पर?
‘दो महीने से सर्वेश शर्मा के प्रोजेक्ट को 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलने की जो खबरें चल रही हैं, वह फर्जी हैं। इस तरह की जानकारी को क्रॉस वैरिफाई किया जाना चाहिए। अब हमीरपुर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि सर्वेश शर्मा कहीं साइबर ठगी का शिकार तो नहीं हुआ है।’
दिग्गजों ने दी थी बधाइयां, अब उठ रहे सवाल
मीडिया रिपोर्ट में जब यह सामने आया कि हमीरपुर जिले के छात्र सर्वेश शर्मा को रक्षा मंत्रालय की ओर से 3.50 करोड़ रुपए की बड़ी ग्रांट मिलने वाली है, तो हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, हमीरपुर से बीजेपी के सांसद व पूर्व मंत्री अनुराग ठाकुर, और हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा सहित अन्य प्रमुख लोगों ने न केवल सर्वेश शर्मा की खुलकर तारीफ की थी, बल्कि इसे हिमाचल के लिए गर्व का विषय बताया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना ने कॉलेज प्रबंधन से संपर्क कर सर्वेश शर्मा का संपर्क नंबर मांगा था। हालांकि कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी बीच, सर्वेश शर्मा के हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने के दौरान ही आईडैक्स डीओ ने एक्स पर उनके दावे का खंडन कर दिया।
साइबर ठगी एंगल और पुलिस जांच
हमीरपुर पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि सर्वेश शर्मा के पास जो कागजात या ईमेल आए थे, वे कहाँ से आए थे। साइबर सेल डिजिटल एविडेंस खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या किसी साइबर गिरोह ने रक्षा मंत्रालय या iDEX के नाम पर फर्जी पत्र तैयार किए थे।