सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज का तीखा हमला, ‘हिमाचल में लॉटरी नहीं, जुए को बढ़ावा दे रही सरकार’
लॉटरी बहाना, जुआ है असली निशाना! सांसद राजीव भारद्वाज ने सरकार से की फैसला वापस लेने की मांग
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने करीब 27 वर्ष से बाद लॉटरी व्यवस्था को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से सियासी गलियारे में घमासान मच गया है। हॉल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार द्वारज लॉटरी शुरू करने के लिए जारी टेंडर तत्काल वापस लेने की मांग की है। वहीं आज वीरवार को कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘अप्रत्यक्ष जुआ’ ( करार दिया है। इतना ही नहीं, डॉ. भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की है कि प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने के लिए इस विवादास्पद निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए।
सामाजिक बुराई को दोबारा न परोसे सरकार
सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि लॉटरी शुरू करने का निर्णय न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह समाज के पतन की ओर ले जाने वाला कदम है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली भाजपा सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस सामाजिक बुराई पर प्रतिबंध लगाया था। अब वर्तमान सरकार द्वारा इसे फिर से शुरू करना प्रदेश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
राजस्व जुटाने के लिए विकल्प तलाशने की सलाह
प्रदेश की डगमगाती आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सांसद ने कहा कि राजस्व बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए अनैतिक रास्तों का सहारा लेना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि लॉटरी के चलते पूर्व में कई परिवार बर्बाद हुए हैं और अनेक आपराधिक घटनाएं सामने आई थीं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह राजस्व जुटाने के लिए अन्य स्वस्थ और रचनात्मक विकल्पों पर विचार करे।
SOP के तर्क को किया खारिज
सरकार द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत युवाओं को इससे दूर रखने के दावों को डॉ. भारद्वाज ने पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल कागजी SOP बनाने से इस निर्णय के नकारात्मक प्रभावों को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार युवाओं और समाज के प्रति संवेदनशील है, तो उसे इस फैसले पर अविलंब पुनर्विचार करना चाहिए।



