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अब ऑफ सीजन में भी नहीं थमेगी चूल्हे की आंच

'मछुआरा सम्मान निधि' से संवरी हिमाचल के मछुआरों की राह

बिलासपुर।

प्रदेश की सुक्खू सरकार ने हिमाचल के हजारों मछुआरा परिवारों के जीवन में छाई आर्थिक अनिश्चितता के बादलों को छांटने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहली बार लागू की गई ‘मछुआरा सम्मान निधि योजना’ उन परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनकी आजीविका प्रजनन काल (ऑफ सीजन) के दौरान दो महीने के मछली आखेट प्रतिबंध के कारण संकट में पड़ जाती थी। इसी कड़ी में आज शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू डाडासीबा आ रहे हैं। मुख्यमंत्री यहां पर मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना वितरण समारोह एवं सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।

आपको बताते चलें कि हिमाचल के जलाशयों में मछली संरक्षण और प्रजनन के लिए हर साल 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। आजीविका का कोई अन्य साधन न होने के कारण यह समय मछुआरों के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होता था। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मानवीय पीड़ा को समझते हुए ‘मछुआरा सम्मान निधि’ की शुरुआत की है। योजना के तहत इस प्रतिबंधित अवधि के दौरान प्रत्येक पात्र मछुआरा परिवार को 3,500 रुपए की सम्मान राहत राशि सीधे उनके खातों में प्रदान की जा रही है।

सिर्फ बिलासपुर जिले की बात करें, तो यहां गोबिंद सागर झील और अन्य जलाशयों पर आश्रित लगभग 1,500 परिवारों को 52 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक मदद पहुंचाई गई है। इसके अलावा, सरकार ने मछुआरों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए रॉयल्टी की दर को 15 प्रतिशत से घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम मछुआरों की शुद्ध आय में वृद्धि करने वाला एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।

पिछले 45 वर्षों से मछली पालन से जुड़े झंडूता के गुरदास और 1978 से गोबिंद सागर में जाल डाल रहे स्वारघाट के चेत राम का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार किसी सरकार को मछुआरों के प्रति इतनी संवेदनशील देखा है। इसी तरह, देश राज और बाबू राम राणा जैसे लाभार्थियों ने इस सहायता को केवल ‘रकम’ नहीं, बल्कि सरकार द्वारा उनके श्रम को दिया गया ‘सम्मान’ करार दिया है। स्थानीय मछुआरा सोसायटियों का मानना है कि इस योजना से अब उन्हें ऑफ सीजन के दौरान कर्ज लेने की मजबूरी से मुक्ति मिली है।

पर्यावरण और आजीविका के बीच बेहतर संतुलन: धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मछली आखेट पर प्रतिबंध पर्यावरण और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए अनिवार्य है, लेकिन इस दौरान मछुआरा परिवारों की रसोई का चूल्हा जलता रहे, यह सुनिश्चित करना सरकार का नैतिक दायित्व है। हमारी सरकार ने सम्मान निधि और रॉयल्टी में कटौती के जरिए एक ऐसा मॉडल पेश किया है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाएगा।

यह योजना न केवल मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार ला रही है, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव को भी मजबूत कर रही है। अब हिमाचल का मछुआरा समाज स्वयं को अधिक सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है।

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