कांगड़ा के नाम बड़ी उपलब्धि: डॉ. अनुराधा को मिला ‘नेशनल इमर्जिंग टोबैको कंट्रोल हीरो’ का राष्ट्रीय सम्मान
डॉ. अनुराधा की 14 वर्षों की तपस्या को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की जिला नोडल अधिकारी (राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम) डॉ. अनुराधा को तंबाकू नियंत्रण और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रतिष्ठित SIPHER National Emerging Tobacco Control Heroes Award 2026 से नवाजा गया है। यह सम्मान डॉ. अनुराधा की पिछले 14 वर्षों की अटूट सेवा, दूरदर्शी नेतृत्व और समुदायों को नशे के जाल से बचाने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
जो़नल अस्पताल, धर्मशाला के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में यह पुरस्कार मुख्य चिकित्सा अधिकारी (कांगड़ा) पद्मश्री डॉ. ओमेश भारती द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराधा शर्मा और स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार सूद भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
चुनौतियों को बनाया अवसर: कांगड़ा में बदली जमीनी हकीकत
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े और भौगोलिक रूप से जटिल जिले कांगड़ा में तंबाकू नियंत्रण नीतियों को लागू करना एक बड़ी चुनौती थी। डॉ. अनुराधा ने प्रशासनिक कुशलता और क्षेत्रीय सक्रियता के समन्वय से इन चुनौतियों को सफलता में बदल दिया। जिला फ्लाइंग स्क्वाड की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने न केवल रणनीतियां बनाईं, बल्कि स्वयं फील्ड में उतरकर प्रवर्तन अभियानों का नेतृत्व किया।
आंकड़ों में सफलता की कहानी
– Tobacco-Free Youth Campaign (TFYC) 2025: इस अभियान के दौरान रिकॉर्ड 1,911 चालान किए गए और ₹2,18,400 का जुर्माना वसूल कर कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया गया।
– शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा: TOFEI पहल के तहत 1,900 स्कूलों/ कॉलेजों और 53 गांवों को पूरी तरह तंबाकू मुक्त घोषित किया गया।
– कड़ी कार्रवाई: सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम और खुले बीड़ी-सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाने वाले नियमों के तहत सघन निरीक्षण कर भारी जुर्माना वसूला गया।
डॉ. अनुराधा का मानना है कि तंबाकू नियंत्रण केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके प्रयासों से जिले में 3 तंबाकू मुक्ति केंद्र और 20 ‘नई दिशा केंद्रों’ का सफल संचालन हो रहा है, जहाँ परामर्श और उपचार के माध्यम से लोगों को नशे की लत छोड़ने में मदद की जा रही है। उन्होंने डिजिटल मीडिया, रेडियो और सामुदायिक संवाद के जरिए जन-जागरूकता को एक आंदोलन का रूप दिया है।
यह राष्ट्रीय पुरस्कार न केवल डॉ. अनुराधा की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह जिला स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, शिक्षा विभाग और पंचायती राज संस्थाओं के सामूहिक परिश्रम का परिणाम है। डॉ. अनुराधा का यह सम्मान पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और यह स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे अन्य पेशेवरों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा।



