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नेपाल की त्रासदी से सबक: 4070 मीटर की ऊंचाई पर शुरू होगी वैज्ञानिक निगरानी

ग्लेशियर फटने के खतरे से निपटेगा लाहौल-स्पीति: सिस्सू में सफल परीक्षण के बाद अब घेपन झील की होगी 24 घंटे मॉनिटरिंग

केलांग।

नेपाल में हाल ही में ग्लेशियर फटने से हुई भारी तबाही को देखते हुए लाहौल-स्पीति प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिले की 4070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित संवेदनशील ‘घेपन ग्लेशियल झील’ से संभावित खतरे को कम करने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा चक्र को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना ने घोषणा की है कि सितंबर माह में इस झील पर एक अत्याधुनिक ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (EWS) स्थापित कर दिया जाएगा।

सिस्सू में सफल रहा तकनीक का परीक्षण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए सी-डैक तिरुवनंतपुरम की मदद ली जा रही है। उपायुक्त ने बताया कि सिस्सू झील पर इस प्रणाली का सफल परीक्षण किया जा चुका है, जहाँ से सटीक आंकड़े प्राप्त हुए हैं। अब एनडीएमए से अंतिम मंजूरी मिलते ही घेपन झील पर भी यह प्रणाली सक्रिय कर दी जाएगी, जिससे जलस्तर और अन्य मानकों की रीयल-टाइम जानकारी मिल सकेगी।

14 दिनों तक झील की ‘कुंडली’ खंगालेगी विशेषज्ञों की टीम
झील के जोखिमों का गहराई से विश्लेषण करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पांच शीर्ष विशेषज्ञों की टीम 1 सितंबर से अपना मिशन शुरू करेगी। यह टीम 14 दिनों तक कठिन परिस्थितियों में रहकर झील की गहराई, मैपिंग, हिमस्खलन की संभावना और जल प्रवाह का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी। इसकी रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर भविष्य की सुरक्षा नीतियां तय होंगी।

इसरो की चेतावनी के बाद बढ़ा सुरक्षा घेरा
गौरतलब है कि नवंबर 2023 में इसरो ने उपग्रह चित्रों के माध्यम से झील के असामान्य रूप से बढ़ते आकार पर चिंता जताई थी। इसके बाद से ही प्रशासन लगातार सक्रिय है। जुलाई 2024 में भी एक उच्च स्तरीय टीम ने झील का दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी।

32 संवेदनशील स्थानों पर ‘हाई फ्लड लेवल’ मार्किंग
बाढ़ की स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए प्रशासन ने सिस्सू से लेकर जिले की अंतिम सीमा तक 32 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जो अत्यधिक संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में ‘हाई फ्लड लेवल’ मार्किंग का कार्य शुरू किया गया है, ताकि स्थानीय निवासियों को संभावित जलस्तर का अंदाजा रहे और वे समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।

ग्लोफ मॉनिटरिंग कमेटी का गठन
सुरक्षा की एक और परत जोड़ते हुए प्रशासन एक विशेष ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ मॉनिटरिंग कमेटी बना रहा है। इसमें विशेषज्ञों के साथ अनुभवी पर्वतारोहियों को भी शामिल किया जाएगा, जो समय-समय पर झील क्षेत्र का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेंगे।

उपायुक्त किरण भड़ाना ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और सामुदायिक जागरूकता के समन्वय से किसी भी संभावित आपदा को रोकना है। सिस्सू और शाशिन जैसे गांवों में ‘त्वरित प्रतिक्रिया दल’ को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि आपात स्थिति में बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया जा सके।

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