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KNH मामला: विधायक डॉ जनक राज ने सरकार से पूछा ’30 करोड़ किसके कहने पर खर्च किए’

कहा, क्या अस्पताल प्रशासन ने लिखित में कहा था कि KNH में रोबोट लगाने की जगह नहीं है?

धर्मशाला/ शिमला।

कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने के बाद डॉक्टरों का कहना है कि अव्यवस्थाएं बढ़ गई हैं। ओपीडी और वार्ड चलाने में काफी परेशानी आ रही है। ऐसे में केएनएच कर्मचारी संघ और सेमडीकोट (डॉक्टरों की एसोसिएशन) ने प्रिंसिपल डॉ. सीता ठाकुर से मुलाकात कर उक्त मामले को पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने और विचार करने का आग्रह किया है। ज्ञात रहे कि केएनएच से गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट कर दिया है। जबकि प्रसूता विभाग को केएनएच में रखा है। इसके चलते अगर किसी प्रसूता महिला को गायनी की दिक्कत होती तो उसे आईजीएमसी भेजा जाता है। इसके बाद फिर आगे के उपचार के लिए आईजीएमसी आना पड़ता है।

पांगी-भरमौर के विधायक डॉ जनक राज का कहना है कि डॉक्टर, मरीज और प्रदेशवासियों ने एक सुर में चेतावनी दी है कि रोबोट के नाम पर गायनी विभाग को शिफ्ट कर के कमला नेहरू अस्पताल को दो-फाड़ नहीं किया जाए, लेकिन सरकार है कि सुनने को तैयार नहीं है। जिस तथाकथित रोबोटिक सर्जरी के नाम पर महिलाओं की जिंदगी को दांव पर लगाया जा रहा है, हकीकत यह है कि 11 मार्च से अब तक एक भी गायनिक सर्जरी उस रोबोट से नहीं हुई। ऐसे में सवाल सीधा है कि ये खरीद स्वास्थ्य सेवा के लिए थी या सिर्फ दिखावे और कमीशन के खेल के लिए?

विधायक डॉ जनक राज ने सरकार से जानना चाहा कि क्या यह रोबोट कमला नेहरू अस्पताल के डॉक्टरों की मांग पर खरीदा गया था, या फिर सरकार ने जबरन थोप दिया? क्या अस्पताल प्रशासन ने लिखित में कहा था कि KNH में रोबोट लगाने की जगह नहीं है? अगर नहीं तो यह पूरा खेल किसके इशारे पर खेला गया? 30 करोड़ रुपए किसके कहने पर खर्च किए गए? क्या स्थानीय मंत्री और विधायक से कोई चर्चा हुई, या सब कुछ बंद कमरों में तय कर दिया गया?

विधायक डॉ जनक राज ने कहा कि आज स्थिति यह है कि महिला मरीज कमला नेहरू और इंदिरा गांधी अस्पताल के बीच धक्के खाने को मजबूर हैं। सरकार की इस अव्यवस्था ने इलाज को सुविधा नहीं, बल्कि संघर्ष बना दिया है। यह सिर्फ एक मशीन का मामला नहीं, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता और सरकारी नीयत पर सीधा सवाल है।

विधायक डॉ जनक राज ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जहां संवेदनशीलता चाहिए थी, वहां सरकार ने सिर्फ प्रचार किया। जहां व्यवस्था चाहिए थी, वहां अव्यवस्था परोस दी गई।

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